प्रदर्शनी देखतीं राज्यपाल आनंदी बेन व अन्य।
लखनऊ। फूलों की सोहबत भला किसे पसंद नहीं होती। फूल न सिर्फ हमारे मन को आनंद से भरते हैं, बल्कि हमें जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। ...और जब बात फूलों की प्रदर्शनी की हो तो चेहरे पर मुस्कुराहट आना लाजिमी भी है। राजभवन में शुक्रवार को 56वीं प्रादेशिक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस तीन दिवसीय फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का भी दर्शन करा रही है।
राज्यपाल ने सशक्त व स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषकों को कृषि उत्पादों के पोषक तत्वों व पोषक मूल्यों की जानकारी होनी चाहिए। किसान मूल्य संवर्द्धित कृषि अपनाएं और अपनी आय बढ़ाएं। कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि प्रतिवर्ष ड्रिप इरीगेशन से सिंचित फसलों के क्षेत्र में वृद्धि हो।
उन्होंने देशी एवं ऑर्गेनिक खेती अपनाने पर बल देते हुए कहा कि इन उत्पादों की बिक्री के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को परस्पर समन्वय स्थापित कर कार्य करने की आवश्यकता जताई। महिला किसानों की भूमिका की सराहना की। इस दौरान निशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया।
1774 प्रतिभागी हुए शामिल, नगर निगम ने लगाए स्टॉल
लखनऊ। राजभवन में लगी प्रदर्शनी में 1774 प्रतिभागी शामिल हुए। नगर निगम ने वेस्ट टू वंडर प्रोडक्ट बनाए। प्रदर्शनी में गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स से वन्यजीव बनाए गए हैं। इसके साथ ही शहर में निकलने वाले मलबे से ब्रिक्स, गमला, दीवार भी नगर निगम के स्टॉल पर प्रदर्शित किया गया है। कूड़े से खाद, प्लास्टिक पैलेट्स भी प्रदर्शित किए गए हैं। कान्हा उपवन में बने प्रोडक्ट्स भी प्रदर्शनी का हिस्सा। गिद्ध, चींटी, मकड़ी, उल्लू, घोंघा, छिपकली, मगरमच्छ, मेंढक, पेंगुइन, मैफलॉन, छिपकली जैसे जीव-जंतु बनाकर उसकी प्रदर्शनी राजभवन में लगाई गई है। नगर निगम आने वाले वक्त में शहर के सभी पार्कों में ऐसी ही रीसाइकिल ऑब्जेक्ट्स तैयार करके लगाएगा। अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव ने बताया कि कान्हा उपवन में संरक्षित भारतीय नस्ल के गोवंश के गोबर से दीये बनाए जाते हैं। श्रीगणेश व लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्ति के साथ ही हवन की लकड़ी आदि भी तैयार की जाती है।