अहमदाबाद में प्लांट देखतीं मेयर सुषमा खर्कवाल।
लखनऊ। राजधानी में नालों को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम अहमदाबाद मॉडल पर काम करेगा। वहां के ड्रेनेज सिस्टम और कचरा प्रबंधन का अध्ययन कर लौटे नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा ने बताया कि लखनऊ में भी नालों को पूरी तरह कवर करने और कूड़े से बिजली बनाने वाले बड़े प्लांट लगाने पर काम किया जाएगा।
पांच जनवरी को महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के नेतृत्व में पार्षदों व अधिकारियों का दल गुजरात दौरे पर गया था। दल में शामिल मुख्य अभियंता (सिविल) महेश वर्मा बुधवार रात लौट आए, मगर अन्य लोग अभी वहीं पर हैं। मुख्य अभियंता (सिविल) महेश वर्मा ने बृहस्पतिवार को बताया कि अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट और स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (एबीडी) मॉडल को बारीकी से देखा गया।
अहमदाबाद में नालों और नालियों में कचरा फेंकने की समस्या नहीं है। वहां सीवर और ड्रेनेज (बारिश का पानी) के लिए अलग-अलग सिस्टम है। लखनऊ में भी ड्रेनेज और सीवर लाइन को अलग करने और नालों को कवर करने की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर महापौर को सौंपी जाएगी।
375 करोड़ की लागत से लगेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
महापौर ने बृहस्पतिवार को पार्षदों के साथ अहमदाबाद में 1000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कूड़े से बिजली बनाने के संयंत्र का निरीक्षण किया। यह प्लांट मार्टिन रिवर्स ग्रेट फायरिंग तकनीक पर आधारित है, जहां प्रति घंटे 65 टन भाप पैदा कर 15 मेगावाट क्षमता की टर्बाइन चलाई जाती है। 14 एकड़ में फैला यह प्लांट पीपीपी मॉडल पर करीब 375 करोड़ रुपये की लागत से बना है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि लखनऊ में भी इसी तरह का प्लांट लगाया जाएगा।