राजधानी को वीमेन फ्रेंडली बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसी क्रम में महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से लखनऊ समेत देश के आठ शहरों को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य के गृह विभाग को 10 फरवरी तक इसकी डीपीआर बनाकर केंद्र को भेजना है।
गृह विभाग ने लखनऊ के अफसरों से इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट मांगी है। लखनऊ के अलावा जो शहर चिह्नित किए गए हैं उनमें देश के चार महानगर दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई के साथ बंगलुरू, अहमदाबाद और हैदराबाद शामिल है।
पिछले दिनों गृह मंत्रालय ने संबंधित प्रदेश के गृह विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इन राज्यों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 10 फरवरी तक शहरों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित उपकरणों और जरूरतों को शामिल करते हुए डीपीआर के साथ दोबारा बुलाया गया है। प्रदेश के गृह विभाग ने लखनऊ के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र भेज कर इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा है।
आईआईएम व 1090 की भी लेंगे मदद
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गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इसके लिए न सिर्फ पुलिस, प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है बल्कि आईआईएम और महिला पावर लाइन की भी मदद ली जा रही है। आईआईएम के प्रोफेसर हिमांशु राय को इसके लिए एक सर्वे रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि महिलाओं से उनकी आवश्यकता अनुसार फीड बैक मिल सके। वहीं महिला पावर लाइन 1090 के अधिकारियों की भी इसमें मदद ली जा रही है।
अफसर बताएं, क्या है जरूरत और कितना आएगा खर्च
सूत्रों का कहना है कि राज्य के गृह विभाग ने महिला कॉलेजों के बाहर, ऐसे सार्वजनिक स्थानों, बाजारों में जहां महिलाओं, छात्राओं को आना जाना अधिक रहता है, स्ट्रीट और चौराहों पर कैमरे के साथ साथ रात में लाइट की पर्याप्त व्यवस्था, सिटी बसों और मेट्रो में महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने के लिए किन किन चीजों की आवश्यकता है, इस पर कितना खर्च आएगा इसकी डिटेल मांगी गई है।