नए सत्र में होने वाले प्रवेश को लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय दो अप्रैल को प्रवेश समिति की बैठक में अंतिम निर्णय लेगा। इससे पहले यह बैठक 16 मार्च को प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ कारणवश इसे स्थगित कर दिया था।
विवि सूत्रों के मुताबिक, उन दिनों कैलाश छात्रावास की प्रोवोस्ट को लेकर चल रहे हंगामे के चलते बैठक को स्थगित करना पड़ा था। प्रवेश समिति की बैठक में स्नातक, परास्नातक व पीएचडी प्रवेश की नीति पर विचार करने के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
वहीं, प्रवेश समिति के मद्देनजर प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा व उनकी टीम भी तैयारियों में जुटी हुई है। टीम पूरी प्रवेश प्रक्रिया को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाने पर काम कर रही है।
हर साल नियुक्त होते हैं नए समन्वयक
विवि में हर साल नए प्रवेश समन्वयक नियुक्त होते हैं। इसके बाद प्रवेश में लगी समन्वयक टीम प्रक्रिया तय करती है। मगर, इसकी वजह से हर साल कुछ न कुछ बदलाव होते हैं। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि नई प्रक्रिया तय करने में ही विवि का काफी समय निकल जाता है।
दूसरा स्टूडेंट्स के लिए भी यह थोड़ा दिक्कत भरा होता है। जैसे 2014 में स्नातक की पूरी प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन हुई, 2015 में प्रवेश की शुरुआत ऑनलाइन हुई, लेकिन बीच में इसे ऑफलाइन कर दिया गया। 2014 में जहां अपने आप सीट अपग्रेडेशन होता था, वहीं 2015 में यह मैनुअल हो गया जिससे प्रवेश में दिक्कतें भी आईं।
ऐसी ही अन्य समस्याओं का समाधान निकालने के लिए वर्तमान प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा और उनकी टीम स्थायी प्रवेश प्रक्रिया तैयार करने में लगी है। एक स्थायी व्यवस्था बना दी जाए और हर साल उसी में आवश्यकतानुसार सुधार करते हुए प्रवेश किए जाएं।
इस साल आवेदन फॉर्म देने के समय ही काउंसलिंग की संभावित तिथियां भी जारी करने पर विचार हो रहा है, इसके अलावा आवेदन से लेकर काउंसलिंग और फीस सबमिशन भी ऑनलाइन करने की तैयारी है।
विभागों से मांगी गईं ये जानकारियां
प्रवेश को लेकर सभी डीन व विभागों के हेड से विभिन्न जानकारियां मांगी गई हैं। जैसे उनके यहां कौन से कोर्स का संचालन होगा, उसमें सीटों की संख्या, शुल्क, अर्हता के मानक आदि। इसके लिए प्रवेश समन्वयक ने विभागों को 2015 के प्रवेश से जुड़ी जानकारी भी भेजी है।
जैसे उस सत्र में विभाग ने कौन-सा कोर्स चलाया, किसमें कितने प्रवेश आए आदि। इसके आधार पर विभाग आसानी से देख सकते हैं कि कौन से कोर्स का संचालन किया जाना है और किसका नहीं। यह जानकारी 31 मार्च तक प्रवेश समन्वयक को दी जानी है।
शिक्षकों को शोध अनुमति देने पर भी निर्णय संभव
डिग्री कॉलेजों के शिक्षक इस समय शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर सोमवार को इन लोगों ने धरना भी दिया। दो अप्रैल की प्रवेश समिति में इस मुद्दे को भी रखा जा सकता है।
लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि प्रवेश समिति में प्रवेश नीति तय होनी है, जिसमें पीएचडी भी शामिल है। कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने पूर्व में हुई प्रवेश समिति में उन्हें राहत देने का आश्वासन दिया था जो अधूरा है। लुआक्टा को उम्मीद है कि आगामी बैठक में उनकी समस्या पर सकारात्मक निर्णय हो सकता है।