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पांच साल में पीजी के साथ पीएचडी की भी डिग्री, लखनऊ विश्वविद्यालय शुरू करेगा इंटीग्रेटेड पीएचडी पाठ्यक्रम

Sat, 06 Feb 2021 03:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ विश्वविद्यालय शैक्षिक सत्र 2021-22 से इंटीग्रेटेड पीएचडी की व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसमें लविवि परास्नातक पर दाखिला लेगा। इसकी डिग्री पूरी करने पर उसे पीएचडी में दाखिला मिल जाएगा और थीसिस जमा करने के बाद उसे डॉक्टरेट की उपाधि मिल जाएगी। नए सत्र से इसके दाखिले शुरू हो जाएंगे।

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प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव के अनुसार, कई विद्यार्थी स्नातक स्तर से ही शोध के लिए गंभीर होते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को परास्नातक स्तर से ही शोध के लिए तैयार किया जाना चाहिए। इसके लिए लविवि ने इंटीग्रेटेड पीएचडी की शुरुआत करने का फैसला किया है। इस पाठ्यक्रम में दाखिला लेने पर विद्यार्थी को पीजी के साथ ही पीएचडी की उपाधि भी मिलेगी। कोर्स की अवधि भी काफी कम रहेगी। सिर्फ पांच साल की अवधि में विद्यार्थी को परास्नातक और पीएचडी दोनों उपाधि मिल जाएंगी। इंटीग्रेटेड पीएचडी पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए विद्यार्थी को स्नातक स्तर पर कम से कम 60 फीसदी नंबर लाना जरूरी होगा। प्रवेश परीक्षा, एकेडमिक इंडेक्स और साक्षात्कार के आधार पर मेरिट बनाई जाएगी। प्रवेश परीक्षा और एकेडमिक इंडेक्स का भाग 40-40 फीसदी और 20 फीसदी नंबर साक्षात्कार के आधार पर दिए जाएंगे।

परास्नातक में 55 फीसदी नंबर अनिवार्य
पीएचडी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए केवल वही विद्यार्थी पात्र होंगे, जो परास्नातक स्तर पर कम से कम 55 फीसदी नंबर या फिर 5.5 सीजीपीए हासिल करेंगे। परास्नातक पाठ्यक्रम में विद्यार्थी को दो साल की अवधि में 96 क्रेडिट भी पूरे करने होंगे। जो विद्यार्थी इन्हें पूरा नहीं कर पाएंगे उनको परास्नातक कोर्स की डिग्री दे दी जाएगी। शोध का टॉपिक आवंटित होने के बाद विद्यार्थी को न्यूनतम दो साल में थीसिस जमा करनी होगी। विद्यार्थी को कोर्स की अवधि के दौरान 75 फीसदी उपस्थित रहना होगा।

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50 हजार रुपये आर्थिक सहायता का भी प्रस्ताव

विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए थीसिस जमा करने पर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव भी है। यह राशि उन विद्यार्थियों को मिलेगी, जिन्हें अन्य स्रोत से कोई स्कॉलरशिप न मिल रही हो। पाठ्यक्रम की अवधि के दौरान राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा पास करने पर पूरे परास्नातक पाठ्यक्रम की फीस वापस करने का प्रस्ताव है।

विभाग में एक बार में अधिकतम पांच दाखिले
इंटीग्रेटेड पीएचडी की सीट केवल उन्हीं विभागों में होगी जहां शिक्षकों की कम से कम 10 पोस्ट हो। इसके साथ ही एक विभाग में इंटीग्रेटेड पीएचडी की अधिकतम पांच सीट की बाध्यता होगी। इस तरह से पीएचडी गाइड के लिए मारामारी की स्थिति नहीं होगी।
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