लखनऊ। आज के जेन-जी युवा परिवार को कैसे देखते हैं? क्या उनके लिए संयुक्त परिवार, माता-पिता की जिम्मेदारी और रिश्तों की पारंपरिक सोच पहले जैसी ही है या समय के साथ इसमें बदलाव आया है। मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया, करियर की दौड़ और महानगरों की जीवनशैली ने युवाओं की सोच को किस हद तक बदला है, इसका लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से गहराई से अध्ययन किया जाएगा।
लविवि के समाजशास्त्र विभाग के प्रो. जय शंकर प्रसाद पांडेय को आईसीएसएसआर का मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट ग्रांट किया गया है। इस शोध के तहत प्रो. जयशंकर देश के चार बड़े महानगरों में जेन-जी और भारतीय परिवारों में आ रहे बदलावों को आसान और व्यावहारिक तरीके से समझने की कोशिश करेंगे। इस परियोजना के लिए प्रो. जय शंकर प्रसाद को 30 लाख रुपये की अनुसंधान राशि स्वीकृत हुई है।
चार महानगरों के जेन जी पर होगा शोध
इस महत्वपूण अध्ययन के तहत दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बंगलूरू जैसे चार बड़े शहरों में युवाओं और परिवारों से बातचीत की जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या देशभर में युवाओं की सोच एक जैसी होती जा रही है या फिर क्षेत्रीय और सांस्कृतिक अंतर आज भी परिवारों को प्रभावित कर रहे हैं।
इस अनूठे अध्ययन से जेन जी पर नीतियां बनाने में होगी आसानी
जेन- जी पर देश के चार बड़े महानगरों में किए जाने वाले इस बृहद शोध के नतीजे कई स्तरों पर उपयोगी होंगे। नीति-निर्माताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलते पारिवारिक ढांचे के अनुसार शिक्षा, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा की नीतियां कैसे बनाई जाएं। सामाजिक संगठनों को युवाओं और बुजुर्गों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने के उपाय मिलेंगे। वहीं, यह शोध माता-पिता को भी नई पीढ़ी की सोच समझने में मदद करेगा।
कुल मिलाकर, यह परियोजना भारतीय परिवार के भविष्य को समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी और समाज को समय के साथ संतुलन बनाने की दिशा दिखाएगी।