प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ विश्वविद्यालय को उसके शताब्दी वर्ष में आजादी की सौंवी वर्षगांठ तक की कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। विवि के 100वें स्थापना दिवस में वर्चुअली शामिल प्रधानमंत्री ने कहा कि लविवि को एक टीम बनाकर इस पर मंथन करना चाहिए कि आजादी की 100वीं जयंती के समय 2047 में वह कहां होगा और देश की उन्नति में क्या योगदान दे रहा होगा।
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उन्होंने विवि के सौ साल के गौरवशाली इतिहास के सहारे नया इतिहास गढ़ने की सीख दी। यहां के पुस्तकालय और कैंटीन की बात कर उन्होंने युवाओं को गुदगुदाया तथा नीयत, सामर्थ्य और इच्छाशक्ति पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने सौ साल पूरे होने पर विवि को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि है। उन्होंने गेट नंबर एक पर पीपल के पेड़ के बारे में उल्लेख किया है, जिसकी स्थापना के बाद से इस विवि की वृद्धि देखी गई है। इस विवि ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे राजनीति, न्यायपालिका, खेल, सिनेमा आदि के कई दिग्गज दिए हैं।
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ऐतिहासिक कला प्रांगण को लेकर कहा कि यहीं से सुभाषचंद्र बोस ने अपना संविधान तैयार करने का नारा दिया था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जब वे लविवि से संबंधित किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो लविवि का जिक्र होते ही उसकी आंखों की चमक देखने वाली होती है।
कार्यक्षेत्र बढ़ने के साथ हो नये कोर्स पर काम
शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का भाषण सुनते लोग
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भले ही लविवि बहुत बदल गया हो पर अभी भी इसका अंदाज लखनवी ही है। नई शिक्षा नीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह आत्म सम्मान और गतिशीलता के निर्माण पर केंद्रित है। विवि न केवल उच्च शिक्षा का केंद्र है, बल्कि चरित्र निर्माण का पावरहाउस भी है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री नीलिमा कटियार ने शताब्दी समारोह के लिए लविवि को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लविवि का कार्यक्षेत्र कई जनपद तक बढ़ रहा है। उसे एक जनपद एक उत्पाद पर काम करते हुए उन जनपदों के स्थानीय उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उससे संबंधित पाठ्यक्रम चलाये जा सकते हैं। इतना ही नहीं उन उत्पादों पर आधारित शोध, तकनीक तथा प्रबंधन भी लविवि को काम करना चाहिए।
बिना नाम लिए कांग्रेस पर साधा निशाना
शताब्दी समारोह में मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री का भाषण पूरी तरह शताब्दी समारोह तथा युवाओं और शिक्षकों पर केंद्रित था। इस दौरान उन्होंने इच्छाशक्ति, सामर्थ्य और नीयत की बात कही। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ से कुछ दूर रायबरेली में स्थित रेल कोच फैक्ट्री इसका उदाहरण है।
मशीनें होने के बावजूद अभी तक यहां पर सिर्फ डेंटिंग-पेंटिंग का काम होता था। इच्छाशक्ति, सामर्थ्य और नीयत की वजह से उनकी सरकार बनने के बाद यहां पर रेल कोच का निर्माण शुरू हो गया है।
विरासत से प्रेरणा लेकर भारत को बनाएं मजबूत : राजनाथ
डिप्टी सीएम ने मालिनी अवस्थी को किया सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
लविवि के पास आईटी चौराहे पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मूर्ति, दूसरे छोर पर बाबा नीम करौरी द्वारा स्थापित हनुमान मंदिर तथा पीछे की ओर मनकामेश्वर मंदिर है। इनकी वजह से यहां अवसाद नहीं पनपता है और निरंतर नई संभावनाएं निकलती रहती हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लविवि की स्थापना के 100 साल होने पर इन शब्दों के साथ अपना बधाई संदेश शुरू किया। वह विशिष्ट अतिथि के रूप में वर्चुअली संदेश दे रहे थे। उन्होंने लविवि के शतायु होने को एक बड़ी उपलब्धि बताया। कहा, भारत में केवल कुछ विश्वविद्यालयों ने ही यह गौरव हासिल किया है। रक्षामंत्री ने युवाओं से कहा कि वह देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत से प्रेरणा लेकर भारत को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी उठाएं। उन्होंने नई शिक्षा नीति बात करते हुए कहा कि यह नीति ‘क्या’ के साथ ‘कैसे’ के बारे में सोचने पर भी बात करेगी।
लविवि के पूर्व विद्यार्थियों का सम्मान
पूर्व विद्यार्थियों के सम्मान का सिलसिला स्थापना दिवस समारोह में भी जारी रहा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा तथा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने मालिनी अवस्थी, मंत्री सुरेश खन्ना, पत्रकार प्रशांत मिश्रा, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, क्रिकेटर सुरेश रैना, लेखक जूही चतुर्वेदी और डॉ. नरेश त्रेहन को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। हालांकि ज्यादातर पूर्व छात्र कोरोना के चलते मुख्य समारोह में शामिल नहीं हुए।
लविवि पर बनी डॉक्यूमेंट्री, कैलेंडर व कॉफी टेबल बुक का विमोचन
कॉफी टेबल बुक का विमोचन
- फोटो : अमर उजाला
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लविवि पर बनी डॉक्यूमेंट्री का उद्घाटन किया। इसे पत्रकारिता और जन संचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुल श्रीवास्तव द्वारा तैयार किया गया है। डॉ. मुकुल श्रीवास्तव तथा डॉ. गीतांजलि मिश्रा द्वारा तैयार की गई कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी समारोह में किया गया।
इस मौके पर निशि पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक का कवर रिलीज किया गया। इसके बाद विवि के शताब्दी कैलेंडर का उद्घाटन किया गया। आईटी टीम ने विवि में स्थापित विभिन्न शोध पीठ और उत्कृष्टता केंद्र का ऑनलाइन प्रदर्शन भी किया।