राजधानी की सड़कों पर एक दिन में गाड़ियां जितना दौड़ती हैं, वह 48 दफा धरती से चंद्रमा (करीब 3.84 लाख किमी) पर जाकर लौट आने के बराबर है।
दरअसल लखनऊवासी रोजाना करीब 3.73 करोड़ किलोमीटर सफर विभिन्न वाहनों से राजधानी की अगल-अलग सड़कों पर कर रहे हैं।
शहर में तेजी से बढ़ रही इस रफ्तार ने उसे तरक्की की दौड़ में आगे किया है, तो यही राजधानी के बाशिंदों को बीमार भी बना रही है।
इसकी सबसे बड़ी वजह दोपहिया और भारी वाहनों से निकलने वाला धुआं बन रहा है। यह खुलासा आईईटी कानपुर के सहयोग से लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के एक अध्ययन में हुआ है।
दोपहिया वाहन बढ़ा रहे मुसीबत
शहर का 56 प्रतिशत ट्रैफिक दोपहिया वाहनों का है। ये दोपहिया वाहन शहर की हवा में नाइट्रोजन और कार्बन जैसे हानिकारक केमिकल घोलने में सबसे आगे हैं।
दूसरी ओर सिर्फ 2 प्रतिशत होते हुए भी भारी वाहन यहां की हवा में एक तिहाई से ज्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड, करीब एक चौथाई सल्फर डाईऑक्साइड और इससे कुछ ज्यादा पार्टिक्यूलेट मैटर (पीएम) घोलने के लिए जिम्मेदार हैं।
जीआईएस आधारित अपनी रिपोर्ट में आईईटी लखनऊ के सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी शुक्ला, रिसर्चर धीरेंद्र सिंह, आईईटी कानपुर के प्रो. मुकेश शर्मा आदि की टीम ने दावा किया है कि राजधानी में करीब 70 प्रतिशत दोपहिया वाहन वर्ष 2005 से पहले के हैं।
ये प्रदूषण उत्सर्जन के लिए तय मानक यूरो 4 या यूरो 5 के मानक के अनुरूप नहीं हैं।
यहां हालात हैं खतरनाक
लखनऊ के भीतरी और पुराने इलाके (हुसैनगंज, हजरतगंज, आलमबाग, कैसरबाग, डालीगंज, बाबूगंज, पुरनिया, अलीगंज, आईटी कॉलेज, चौक)
शहर के बाहरी इलाकों जानकीपुरम विस्तार, गोमतीनगर विस्तार, सरोजिनी नगर, तेलीबाग, नीलमथा, कैंट, एल्डिको- 2 में कम वायु प्रदूषण है।
इस प्रदूषण से सांस के रोग, ब्रॉन्काइटिस व एम्फिसेमा, अस्थमा, हृदय रोग, सांस से जुड़ी बीमारियां और कई समस्याएं हो सकती हैं।
ऐसे सुधरेंगे हालात
आईआईटी लखनऊ के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी प्रो. एसपी शुक्ला ने बताया कि लखनऊ के केंद्र में मौजूद इलाके बहुत ही खराब हालात में पहुंच चुके हैं।
शहरी आबादी के लिए वायु प्रदूषण बड़ी चुनौती बन चुका है। इसमें करीब 60 प्रतिशत योगदान सड़क पर दौड़ रहे 14 लाख वाहनों का है।
ट्रांसपोर्टेशन की बेहतर व्यवस्था, घने रिहाशयी क्षेत्रों पर नियंत्रण और पौधरोपण पर जोर देकर हालात में सुधार लाया जा सकता है।