दिल्ली दूर नहीं, अब तक जुमलों में कहने-सुनने वाली यह बात लखनऊ वासियों के लिए हकीकत बनने वाली है। यह संभव होने वाला है लखनऊ को रेलवे के हाईस्पीड कॉरिडोर में शामिल किए जाने से। अगले दो साल में योजना के जमीन पर उतरने के बाद लखनऊ से नई दिल्ली का 511 किलोमीटर ट्रेन का सफर महज 3.30 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
देश के नौ चुनिंदा रेलखंडों पर हाईस्पीड ट्रेन चलाने की रेल बजट की घोषणा में लखनऊ को भी शामिल किया गया है। हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए तकनीकी जांच करने सहित सभी प्रारंभिक तैयारियों का जिम्मा लखनऊ स्थितअनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) को सौंपा गया है।
पिछले रेल बजट में हाईस्पीड ट्रेन दौड़ाने के लिए कानपुर से नई दिल्ली तक 440 किलोमीटर तक का रेलखंड शामिल किया गया था। रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इसका विस्तार लखनऊ तक करते हुए प्रोजेक्ट को दोबारा शामिल कर लिया है।
लखनऊ से कानपुर होकर नई दिल्ली तक हाईस्पीड ट्रेन की अधिकतम गति 200 किमी. प्रति घंटा, जबकि औसत गति 150 किमी. प्रति घंटा होगी। लखनऊ से कानपुर के रास्ते नई दिल्ली तक के रेल ट्रैक और इसके मोड़ को ठीक करना, पुलों और सिग्नल व्यवस्था को बेहतर करने सहित प्रारंभिक तैयारियों का जिम्मा आरडीएसओ को सौंपा गया है।
ट्रैक्सन वाली होंगी बोगियां
हाईस्पीड ट्रेन के लिए वर्तमान पटरियों का तो इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन रफ्तार बढ़ाने के लिए इसमें मुंबई की लोकल ट्रेनों वाली ट्रैक्सन बोगियों और इंजन लगाई जाएंगी। पहले चरण में ये बोगियां विदेश से आयात की जाएंगी।
बोगियों के चीन से मिलने की संभावनाएं अधिक हैं। ट्रेन शेड डिस्ट्रिब्यूटर पावर सिस्टम कम एक्सेल प्रणाली के आठ शेड मंगवाए जाएंगे। हर शेड पर तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा। शेड में ट्रैक्सन मोटर होती है, जो हर दो से तीन बोगी के बीच लगी होती है।
इससे मुंबई लोकल की तरह ट्रेन को गति प्रदान करने में मदद मिलेगी। हाईस्पीड के लिए तीन से चार करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च आएगा।
चीन की हाईस्पीड ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले शेड सस्ते हैं, लिहाजा उनकी तकनीक को लागू करने पर अधिक विचार चल रहा है। आरडीएसओ इस तकनीक को लेकर इसे अपनी रेल कोच फैक्ट्री और इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री को सौंपेगा।
इस तरह बनेगा नया रूट
रेलवे ने अलीगढ़ से दिल्ली और अलीगढ़ से कानपुर के लिए नई तीसरी रेल लाइन के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया है। इस नई रेल लाइन पर ओवर नाइट यात्रा वाली दिल्ली-हावड़ा ट्रेन को चलाया जा सकेगा, जिससे रास्ते में किसी तरह की बाधा न हो।
आरडीएसओ के डीजी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए देश के नौ चुनिंदा रेलखंड में नई दिल्ली-कानपुर-लखनऊ को भी शामिल किया गया है। लखनऊ से कानपुर और फिर कानपुर से नई दिल्ली तक रेल ट्रैक को हाईस्पीड ट्रेनों के दौड़ने में आने वाली तकनीकी बाधाओं को जल्द दूर किया जाएगा।
दो साल में इस रेलखंड पर हाईस्पीड ट्रेन दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद लखनऊ से दिल्ली सिर्फ 3:30 घंटे में पहुंचा जा सकेगा।