इंस्पेक्टर ने बताया कि शिवा के साथी दीपक ने फर्जीवाड़े की बड़ी साजिश रची थी। आरोपी इतनी बड़ा फर्जीवाड़ा खुद नहीं कर सकते थे। ऐसे में पूरी आशंका है कि इसमें कई बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस जांच में कुछ अन्य खाताधारकों की भूमिका देखी जा रही है।
गहनों और बिजली उपकरणों में भी खपाई गई रकम
शिवा ने फर्जीवाड़े की कुछ रकम गहनों, बिजली उपकरणों और कुछ संपत्तियों में खपाई थी। पुलिस को आरोपियों के पास से करीब ढाई लाख के जेवर, कार, चांदी के सिक्के, तीन मोबाइल, एक लैपटॉप, प्रिंटर और 47 हजार रुपये बरामद हुए हैं। आरोपी इसी प्रिंटर के जरिये पीड़ित ग्राहकों को देने वाली एफडी की फर्जी रसीदें तैयार करता था।
साक्ष्य मिटाने के लिए बैंक में आग लगाने का लगा था आरोप
बैंक की इसी शाखा में 25 नवंबर 2025 को संदिग्ध हालात में भीषण में आग लग गई थी। घटना में कई दस्तावेज और व अन्य चीजें जलकर राख हो गई थीं। पीड़ित ग्राहकों ने अधिकारियों व आरोपी बैंक मित्र पर फर्जीवाड़े को छिपाने और साक्ष्य मिटाने के लिए आग लगाने का आरोप लगाया था। आग के कारण बैंक के सभी दस्तावेज जलकर राख हो गए थे।