लखनऊ। अदब का शहर लखनऊ सिर्फ अपनी मेहमाननवाजी के लिए ही नहीं जाना जाता है, इसकी आधुनिक पहचान दिल के इलाज के लिए भी है। प्रदेश भर में दिल के इलाज के लिए होने वाले कुल प्रोसीजर में से आधे सिर्फ पांच संस्थान में होते हैं। इन पांच में से चार संस्थान लखनऊ के हैं। उत्तर प्रदेश कार्डियोलॉजी सोसाइटी की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है।
जर्नल ऑफ द प्रैक्टिस ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेज के ताजा में अंक में प्रकाशित उत्तर प्रदेश कार्डियोलॉजी सोसाइटी की रिपोर्ट में वर्ष 2022-23 और 2023-24 तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसके अनुसार प्रदेश भर में इस समय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को छोड़कर कुल 180 केंद्रों में मौजूद 224 कैथलैब पर दिल के इलाज की व्यवस्था है। इनमें सबसे ज्यादा 31 कैथलैब लखनऊ में हैं।
इन कैथलैब पर वर्ष 2023-24 में पेसमेकर लगाने के 7,168, धमनियों के ब्लॉक खोलने के 52,655 और स्टेंट डालने के 80,382 प्रोसीजर हुए। इनमें से आधे प्रोसीजर अकेले पांच केंद्रों पर ही हुए। इन पांच केंद्रों में पहले नंबर पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का लारी कार्डियोलॉजी, दूसरे पर कानपुर का लक्ष्मीपति सिंघानिया इंस्टीट्यूट, तीसरे पर लखनऊ का लोहिया संस्थान, चौथे पर संजय गांधी पीजीआई और पांचवे पर लखनऊ के शहीद पथ स्थित निजी अस्पताल है।
55 फीसदी जनपदों में एक भी कैथलैब नहीं
लखनऊ के अस्पतालों पर दिल के मरीजों के दबाव को इससे समझा जा सकता है कि 55 फीसदी जनपदों में एक भी कैथलैब नहीं हैं। ऐसे में इन जनपदों के मरीज अन्य जनपद जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मिर्जापुर और चित्रकूट मंडल में एक भी कैथलैब नहीं है। लखनऊ के अलावा आगरा में 26, वाराणसी में 17, गोरखपुर में 11, बरेली में 11, मुरादाबाद में 10 और कानपुर में नौ कैथलैब हैं।
क्या है कैथलैब
कैथलैब (कैथीटेराइजेशन प्रयोगशाला) दिल के इलाज के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा है। यहां डॉक्टर बिना चीरा लगाए हृदय रोगों का उपचार करते हैं। कैथलैब में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्टेंट लगाने और पेसमेकर लगाने की प्रक्रियाएं की जाती हैं।
अन्य जनपदों में बेहतर हो रही स्थिति
Iयह सही है कि इस समय सबसे ज्यादा प्रोसीजर केजीएमयू में हो रहे हैं। अच्छी बात है कि अन्य जनपदों में भी दिल के इलाज की व्यवस्था में सुधार हो रहा है। एसटी-एलिवेशन मायोकार्डियल इंफ्रक्शन (स्टेमी) कार्यक्रम के तहत प्रमुख संस्थान जिलों के सरकारी अस्पतालों को सहयोग कर रहे हैं। इससे भी स्थिति में सुधार आ रहा है। I
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- प्रो. ऋषि सेठी, विभागाध्यक्ष, लारी कार्डियोलॉजी केजीएमयूI