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Lucknow: सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंककर्मी को 51 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, 2.75 करोड़ वसूले, सब कुछ खोया

Fri, 10 Oct 2025 08:47 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंककर्मी से ठग ने सब कुछ लूट लिया। उन्हें इतना परेशान किया कि वह बचने के लिए ठग की सारी बातें मानने को तैयार हो गए। यहां तक की एफडी और म्युचुअल फंड भी तुड़वा दिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : freepic
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विस्तार
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साइबर जालसाजों ने विकासनगर निवासी सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंककर्मी सिद्धार्थ नाथ को 51 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 2.75 करोड़ रुपये वसूल लिए। डराने के लिए उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी बताया और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिये उनकी कोर्ट में पेशी तक करा दी। मामले में विकासनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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पीड़ित के मुताबिक 30 जुलाई को सुबह 10:57 बजे उन्हें व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से ऑडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मी बताया और पूछा कि क्या आपने 15 जुलाई को मुंबई में सिम खरीदा था, जिसका इस्तेमाल गलत गतिविधियों में हो रहा है।

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पीड़ित के मना करने पर उसने कहा कि यदि आपने सिम खरीदा है तो वह दो घंटे में ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस से शिकायत करनी पड़ेगी। इसके बाद ठग ने कॉल फर्जी पुलिसकर्मी को ट्रांसफर कर दी। कुछ देर बाद पुलिसकर्मी बने एक ठग ने पीड़ित से कहा कि तुम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी हो। डिजिटल कोर्ट में तुम्हारी पेशी होगी। यह सुन सिद्धार्थ नाथ घबरा गए और जालसाजों की बातों में आ गए।

दिखाया कोर्ट का फर्जी सेट, सात दिन की रिमांड पर भेजा
पीड़ित के मुताबिक कुछ देर बाद उनके पास फिर व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई। पुलिसकर्मी बने ठग ने कहा कि कॉल से ही तुम्हारी कोर्ट में पेशी होगी। थोड़ी देर बाद उसने वीडियो कॉल पर कोर्ट रूम दिखाया और पीड़ित को अपना कमरा बंद करके बैठने लिए कहा। बताया कि पेशी शुरू हो गई है। ठग ने बताया कि उन्हें सात दिन की रिमांड पर भेजा गया है। कहा कि यदि तुम चाहो तो जल्द ही जमानत मिल जाएगी, मगर तुम्हें पूछताछ में सहयोग करना पड़ेगा। इस पर वह मान गए।

एफडी, म्यूचुअल फंड तुड़वाए: ठग ने पीड़ित को पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया। उन्हें इतना परेशान किया कि वह बचने के लिए ठग की सारी बातें मानने को तैयार हो गए। ठग ने दो अगस्त से लेकर 19 सितंबर तक धीरे-धीरे सिद्धार्थनाथ से उनके म्यूचुअल फंड, एफडी, पेंशन व मृत पत्नी की जमा पूंजी मिला कर कुल 2.75 करोड़ वसूल लिए। 19 सितंबर को ही ठग ने उन्हें छोड़ा, मगर जमानत नहीं दी।

जमानत के नाम पर फिर मांगे 50 लाख : वरिष्ठ सेवानिवृत्त बैंककर्मी ने बताया कि वह जीवन भर की जमा पूंजी गंवाने का दुख झेल ही रहे थे कि 24 सितंबर को एक बार फिर ठग ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल की। कहा कि तुम्हें जमानत का आदेश मिल जाएगा, मगर इसके लिए तुम्हें 50 लाख रुपये और देने पड़ेंगे। पीड़ित के असमर्थता जताने पर उसने कॉल काट दी। बाद में उन्हें ठगे जाने का अहसास हुआ।

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तबीयत और मानसिक स्थिति बिगड़ी

कुछ ही दिन में 2.75 करोड़ रुपये ठगे जाने से कहा की तबीयत और मानसिक स्थिति बिगड़ गई। झिझक और शर्म के चलते वह अपने साथ हुई ठगी की शिकायत पुलिस से नहीं कर सके। बाद में पीड़ित को ज्यादा परेशान होता देख घरवालों के समझाने पर वह मान गए और छह अक्तूबर को विकासनगर पुलिस से शिकायत की। थानाध्यक्ष आलोक सिंह के मुताबिक मामले में केस दर्ज किया गया है। जांच के लिए केस साइबर क्राइम थाने ट्रांसफर किया गया है।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें : अगर आपके पास अनजान नंबर से कॉल आए तो सावधान हो जाएं। अगर कॉल करने वाला शख्स यह कहता है कि आपके नाम से पार्सल बुक है। कस्टम विभाग ने पकड़ा है। केस दर्ज कर करके कार्रवाई की जा रही है.... तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ये कॉल साइबर ठग की होती है। तत्काल पुलिस से शिकायत करें।

यहां करें शिकायत यदि आप ठगी का शिकार होते हैं तो साइबर क्राइम थाने, साइबर सेल, लोकल पुलिस स्टेशन, टोल फ्री नंबर 1930 या www.cybercrime. gov. in वेबसाइट के जरिये शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

राजधानी में पहले इनसे भी हो चुकी ठगी
- इंदिरानगर के लक्ष्मणपुरी विस्तार निवासी निजी कॉलेज की प्रोफेसर प्रमिला मानसिंह से 78.50 लाख रुपये हड़पे गए।
- कनाडा के रहने वालीं सुमन कक्कड़ व उनकी बहन से 1.88 करोड़ ऐंठे गए।
- बाजारखाला के ऐशबाग निवासी सरकारी बैंक के पूर्व कर्मचारी प्रभात कुमार से 1.20 करोड़ हड़पे गए।
- एसजीपीजीआई की महिला डॉक्टर रुचिका टंडन से 2.81 करोड़ वसूले गए।
- हजरतगंज के अशोक मार्ग पर रहने वाले डॉक्टर पंकज रस्तोगी की पत्नी दीपा से 2.71 करोड़ की ठगी हुई।
- हजरतगंज निवासी मरीन इंजीनियर एके सिंह से 84 लाख की ठगी हुई।
- ठाकुरगंज के पंचायती राज विभाग से रिटायर कमल कांत मिश्रा से 17 लाख 50 हजार वसूले गए थे।
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