राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं नृत्य गुरु प्रेमचंद होम्बल
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वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरुस्कार और 2021 के केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित विश्वविख्यात भरतनाट्यम नृत्य गुरु प्रेमचन्द होम्बल का निधन शनिवार दोपहर 1 बजकर 31 मिनट पर मेदांता अस्पताल में हो गया। चिकित्सकीय शिक्षण के लिए उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस के इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में अपना देहदान किया था।
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षिका और नृत्य गुरु प्रेमचन्द होम्बल शिष्या गरिमा ने बताया कि उनका भरतनाट्यम एवं नाट्यशास्त्र के प्रचार प्रसार में विशेष योगदान रहा है। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंचकला संकाय में लगभग 37 वर्ष तक कार्यरत रहे। रविवार को उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए वाराणसी ले जाया जाएगा। इसके बाद उनकी देहदान की इच्छा को परिवार की ओर से पूर्ण किया जाएगा।
प्रेमचंद के पिता को भी मिला था शिखर सम्मान
शास्त्रीय संगीत, कथक और भरत नाट्यम के प्रशंसक स्वर्गीय शंकर होम्बल को भरत नाट्यम के पंडित के रूप में याद करते हैं। स्वर्गीय होम्बल को 1997 में भरत नाट्यम में शिखर सम्मान मिला था। उनके ही पुत्र थे प्रेमचंद होम्बल।
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नृत्य विभाग, मंच कला संकाय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रेमचंद होम्बल को संगीत नाटक अकादमी सम्मान से विभूषित किया था। उन्हें नृत्य के क्षेत्र में समग्र योगदान को देखते हुए 2021 के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
उन्होंने कई नाटकों और बैले की कोरियोग्राफी भी की। 'उत्तर प्रियदर्शी', 'त्रिपथगा', 'बुद्ध चरित्र', 'जातकम', 'महिषासुर मर्दिनी'। संस्कृत नाटक 'दूतवाक्यम', 'कर्णाभरम' 'ऊरुभंगम' का निर्देशन करने के अलावा प्रेमचंद होम्बल ने 'मालविकाग्नि मित्रम', 'विक्रमोर्वशियम' और 'वाणीसंभर' में भी अभिनय किया।