जीएसटी चोरी रोकने को लेकर वाणिज्यकर विभाग द्वारा व्यापारियों के रिटर्न के साथ आईटीसी क्लेम, जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी के टैक्स डाटा में अंतर का विश्लेषण कराया जाएगा। इसके लिए सभी जोन के एडिशनल कमिश्नरों को डाटा मुहैया कराए गए हैं। इतना ही नहीं, डाटा को जोनवार अलग-अलग करते हुए विभाग की जीएसटी एमआईएस पर तैयार किए गए बिजिनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिसिस (बीफा) पर उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस संबंध में वाणिज्यकर कमिश्नर ने सभी जोन के एडिशनल कमिश्नरों को दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं।
विभागीय स्तर पर हुए विश्लेषण में जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों द्वारा दाखिल जीएसटीआर-1 (बिक्रीशुदा माल का विवरण) और जीएसटीआर-3बी (टैक्स व आईटीसी का विवरण) के आंकड़ों में भारी अंतर मिला है। इससे बड़े पैमाने पर कर चोरी की आशंका है। इसके मद्देनजर ऐसे व्यापारियों को चिह्नित करके उनके द्वारा दाखिल रिटर्न और आईटीसी क्लेम का विश्लेषण कराने का फैसला किया गया है। वहीं, कॉमन पोर्टल पर लगातार छह महीने या दो त्रैमासिक रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों का पंजीयन रद्द किया जाएगा। इसके अतिरिक्त गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करने वाले व्यापारियों की आईटीसी को एक साल के लिए ब्लॉक कर दिया जाएगा। ये आदेश माल एवं सेवाकर (जीएसटी) अधिनियम-2017 के तहत दिए गए हैं।
एडिशनल कमिश्नरों को भेजे गए तीन प्रकार के डाटा में लगातार छह माह तक रिटर्न न दाखिल करने वाले व्यापारियों, पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले ऐसे व्यापारी, जिनके जीएसटीआर-1 व जीएसटीआर-3बी के व्यापारिक विवरण में 50 लाख से अधिक के टैक्स का अंतर के अलावा उन व्यापारियों का विवरण भेजा गया है, जिनकी आईटसी ब्लॉक हुए एक साल का समय पूरा होने वाला है। वाणिज्यकर आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस संबंध में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।