भीषण गर्मी और बिजली किल्लत के चलते राजधानी में एक महीने में रिकॉर्ड 9560 परिवारों ने सौर ऊर्जा को अपनाया है। अब तक किसी भी महीने में इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने सोलर प्लांट नहीं लगाया था। साल भर की बात करें तो लखनऊ में सौर ऊर्जा उपभोक्ताओं का आंकड़ा डेढ़ गुना हो चुका है।
यूपी नेडा के आंकड़ों के मुताबिक पीएम सूर्य घर योजना के तहत 23 अप्रैल 2026 तक लखनऊ में कुल 91,003 सोलर प्लांट लगाए गए थे। 25 मई को यह आंकड़ा 9560 बढ़कर 1,00,563 पहुंच गया। इन दिनों रोजाना औसतन 370 सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। मार्च में प्रतिदिन प्लांट लगाने का औसत 200 था जो अप्रैल में 290 पहुंच गया था। इस आंकड़े में गैर सब्सिडी वाले सोलर पैनल शामिल नहीं हैं।
यूपीनेडा के जिला परियोजना अधिकारी टीकाराम के अनुसार लखनऊ में सोलर पैनल लगाने की संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है। दूसरे नंबर पर कानपुर नगर, तीसरे पर वाराणसी और चौथे पर प्रयागराज का नंबर आता है।
हर छत पर हो सोलर तो मांग का दोगुना होगा उत्पादन: सौर ऊर्जा विशेषज्ञ व स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के महानिदेशक प्रो. डॉ भरत राज सिंह बताते हैं कि 50-60 लाख की आबादी वाले शहर में 15 लाख से ज्यादा घर होंगे। यदि हर घर की छत पर संयंत्र लग जाए तो अकेले लखनऊ में ही 4500 मेगावाट से ज्यादा बिजली का उत्पादन हो सकेगा।
सोलर पैनल लगाने पर ऐसे होती है बचत: एक किलोवाट के सोलर पैनल से महीने में लगभग 150 यूनिट बिजली बनती है। तीन किलोवाट के प्लांट से 450 यूनिट बिजली बनेगी। सात रुपये यूनिट के हिसाब से तीन किलोवाट का बिल 3500 रुपये होता है। एक किलोवाट पर केंद्र व राज्य सरकार दोनों मिलाकर कुल 45 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 90 हजार और तीन किलोवाट पर 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी देती हैं।
| राजधानी में ऐसे बढ़े सोलर पैनल (लगभग) |
| वित्तीय वर्ष |
नए पैनल |
कुल इंस्टॉलेशन |
| 2021-22 |
18,000 |
41,500 |
| 2022-23 |
28,000 |
69,500 |
| 2023-24 |
45,000 |
114,500 |
| 2024-25 |
75,000 |
189,500 |
| 2025-26 |
100,000 |
299,500 |