याची का कहना है कि उसके खिलाफ पुलिस की चार्जशीट, अन्य धाराओं के साथ आईपीसी की धाराओं 167 व 218 में भी दाखिल की गई है। दलील दी गई है कि इन दोनों धाराओं के तहत उल्लिखित अपराध लोक सेवक द्वारा अपने सरकारी काम के दौरान ही किया जाना संभव है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने याचिका दाखिल की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बाहर रेप पीड़िता और उसके गवाह के आत्मदाह करने के मामले में अपने खिलाफ दाखिल आरोपपत्र पर सीजेएम द्वारा संज्ञान लेने को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता ने बृहस्पतिवार को याचिका पर राज्य सरकार के अधिवक्ता को सरकार से निर्देश लेने को कहा है। कोर्ट ने मामले को 9 मई के सप्ताह में सूचीबद्ध करने को भी कहा है।
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याची का कहना है कि उसके खिलाफ पुलिस की चार्जशीट, अन्य धाराओं के साथ आईपीसी की धाराओं 167 व 218 में भी दाखिल की गई है। दलील दी गई है कि इन दोनों धाराओं के तहत उल्लिखित अपराध लोक सेवक द्वारा अपने सरकारी काम के दौरान ही किया जाना संभव है। लिहाजा इन धाराओं के तहत अभियोजन चलाने के लिए राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति लिया जाना अनिवार्य है। कहा गया है कि इस मामले में राज्य सरकार ने अभियोजन स्वीकृति नहीं दी। इसके बावजूद सीजेएम द्वारा आरोपपत्र पर संज्ञान ले लिया गया।