मलबे को समेटती जेसीबी मशीन।
- फोटो : अमर उजाला
बिल्डिंग गिरने की आशंका के चलते आसपास के घरों में अफरा-तफरी मची तो महिलाओं और बच्चों की रुलाई कोहराम मच गया। पड़ाेसियों ने बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेज दिया। पुलिस बचाव में जुटी थी कि अचानक बिल्डिंग गिर गई तो मौके पर नगर आयुक्त डॉ. इंद्रजीत सिंह, एलडीए अपसर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा जिम्मेदारों से संग पहुंचे। इन अफसरों को अवैध रूप से किए जा रहे निर्माण के चलते लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। अफसर जांच करके चले गए तो शाम चार बजे से गिरी बिल्डिंग का मलबा हटने का सिलसिला शुरु हुआ।
किराएदार परिवार का प्रदर्शन, रात को होती थी खुदाई
वकील केके द्विवेदी की किराएदार विमला ने लोगों को बताया कि इस बिल्डिंग में उसका परिवार लगभग 60 साल से रह रहा था। बिल्डिंग गिरने से उनकी जान तो बच गई, मगर जीवन भर की गृहस्थी उसमें दबी है। बेसमेंट के दूसरी तरफ के हिस्से में परिवार के पांच सदस्य रहते थे। विमला ने यह भी बताया कि गिरने वाले मकान में केके द्विवेदी का परिवार नहीं रहता। बेसमेंट की खुदाई रात को चल रही थी। परिवार के प्रदर्शन पर एलडीए के द्वारा शारदानगर योजना में प्रधानमंत्री आवास दिए जाने का आश्वासन दिया गया है।