रामलला की मूर्तियों पर बोले चंपत राय
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अरुण योगीराज मूलतः कर्नाटक के मैसूर से हैं। उनके परिवार में एक से बढ़कर एक मूर्तिकार रहे हैं। उनकी पांच पीढ़ियां मूर्ति बनाने या तराशने का काम कर रही हैं। अरुण को बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक था। अरुण ने एमबीए किया है। इसके बाद वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे, लेकिन मूर्तिकला को नहीं भूल पाए। आखिरकार साल 2008 में जॉब छोड़कर उन्होंने मूर्तिकला में कॅरियर बनाने का रिस्क लिया। उनका रिस्क सफल रहा। वे देश के जानेमाने मूर्तिकार बन गए। अरुण योगीराज ने इंडिया गेट पर लगी नेता जी सुभाष चंद्र बोस की 30 फीट की मूर्ति तैयार की थी। इस मूर्ति को बोस की 125वीं जयंती पर लगाया गया था। इस दौरान अरुण ने पीएम मोदी को भी बोस की दो फीट की प्रतिमा भेंट की थी। इसके लिए अरुण योगीराज का पीएम मोदी ने आभार भी जताया था। अरुण के दादा बसवन्ना शिल्पी भी जाने माने मूर्तिकार थे। उन्हें मैसूर के राजा का संरक्षण हासिल था।
इन प्रतिमाओं की वजह से चर्चा में आए अरुण योगीराज
- केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा।
- मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की प्रतिमा।
- मैसूर के राजा की 14.5 फीट ऊंची सफेद अमृत शिला प्रतिमा।
- मैसूर के चुंचनकट्टे में हनुमानजी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा।
- संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर की 15 फीट ऊंची प्रतिमा।