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बड़ी साजिश का खुलासा: UP ATS के रडार पर आए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कई छात्र, दो आतंकी रिमांड पर

Tue, 07 Nov 2023 09:05 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

जांच में सामने आया है कि आईएस का पुणे माड्यूल यूपी के छह जिलों में अपनी गहरी जड़ें जमा रहा था। आईएस के इस माड्यूल के सदस्य अलीगढ़ के अलावा संभल, प्रयागराज, लखनऊ, रामपुर, कौशांबी आदि जिलों में सक्रिय हैं।
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यूपी एटीएस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आतंकी संगठन आईएस के दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार करने वाली यूपी एटीएस के रडार पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कई अन्य छात्र भी हैं। एटीएस ने उनको भी मुकदमे में नामजद किया है। जांच में सामने आया है कि आईएस का पुणे माड्यूल यूपी के छह जिलों में अपनी गहरी जड़ें जमा रहा था। आईएस के इस माड्यूल के सदस्य अलीगढ़ के अलावा संभल, प्रयागराज, लखनऊ, रामपुर, कौशांबी आदि जिलों में सक्रिय हैं। साथ ही किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए असलहे और गोला-बारूद एकत्र कर रहे हैं।

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बता दें कि इस मामले में एटीएस की अलीगढ़ इकाई के प्रभारी मोहम्मद अकरम ने बीती तीन नवंबर को एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें झारखंड निवासी शाहनवाज, दिल्ली निवासी रिजवान, अलीगढ़ निवासी वजीहुद्दीन, अब्दुल्ला अर्सलान, माज बिन तारिक, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अब्दुल समद मलिक, फैजान बख्तियार, दिल्ली के बाटला हाउस निवासी अरशद वारसी, संभल के चंदौसी निवासी मोहम्मद नावेद सिद्दीकी, प्रयागराज निवासी रिजवान अशरफ और अन्य को नामजद किया गया था।

इनमें से अब्दुल्ला अर्सलान और माज बिन तारिक को एटीएस ने रविवार को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया था। एटीएस की जांच में सामने आया कि आईएस के पुणे माड्यूल के आतंकी शहनवाज और रिजवान अली का इन सभी से गहरा संपर्क है। 
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प्रयागराज निवासी रिजवान अशरफ इस्लामिक शिक्षा हासिल कर चुका है और आईएस की विचारधारा से प्रभावित होकर स्टूडेंट्स ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी संगठन के माध्यम से इन सभी से जुड़ा हुआ है। वहीं दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार शहनवाज और रिजवान एएमयू के इन छात्रों व अन्य के साथ मिलकर आईएस के लिए काम कर रहे हैं।

इसके लिए शहनवाज कई महीनों तक अलीगढ़ में किराए का मकान लेकर रहा था और उसने अपने साथियों की मदद से खदीजा नामक महिला से शादी से की थी। उसने महिला का धर्मांतरण कराने के बाद निकाह किया था। वहीं रिजवान ने बाकी लोगों को आईएस की बैयत (शपथ) दिलाई थी। इनके द्वारा आईएस की विचारधारा का प्रचार प्रसार किया जाता था। ये सभी एएमयू के बाकी छात्रों को भी आईएस से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तानी में बैठे हैंडलर से निर्देश लेते थे। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए गोपनीय तरीके से एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। एटीएस की टीमें इस संगठन के सदस्यों की तलाश में जगह-जगह छापे मार रही हैं।

छह दिन की रिमांड मिली
एटीएस की गिरफ्त में आए अब्दुल्ला अर्सलान और माज बिन तारिक को राजधानी स्थित एनआईए/एटीएस की अदालत के न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने छह दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की है। दोनों को एटीएस बुधवार को अपनी अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करेगी और अलीगढ़ समेत बाकी जिलों में जाकर छापे मारेगी। दोनों को 13 नवंबर को वापस लखनऊ जेल में दाखिल कराया जाएगा।

शरिया कानून स्थापित करने का था मंसूबा
इन सभी का मंसूबा बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देकर लोकतंत्र को अस्थिर करने और देश में शरिया कानून को स्थापित करना था। इसके लिए यह संगठन घातक असलहे और केमिकल बम बनाने के लिए उपकरण आदि जुटा रहा था। ये सभी विभिन्न माध्यमों के जरिए भारत सरकार के विरुद्ध नफरती सामग्री पोस्ट करते थे।

पूछताछ में हुआ खुलासा
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किये गये शहनवाज और रिजवान से एटीएस की टीम ने दिल्ली जाकर पूछताछ की थी। इस दौरान उनका अलीगढ़ कनेक्शन सामने आया था। वहीं प्रयागराज निवासी रिजवान अशरफ के ठिकानों पर एनआईए और एटीएस की टीम ने कुछ दिन पहले छापा मारकर कई अहम सुबूत भी जुटाए थे।

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