वाराणसी के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन को स्थानांतरण के बाद कार्यभार ग्रहण न करने के आरोप में 2008 में दी गई थी सजा
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। वाराणसी के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. अनिल कुमार प्रधान के खिलाफ वर्ष 2008 में पारित दो वेतन वृद्धि रोकने संबंधी दंडादेश को राज्य लोक सेवा अधिकरण ने निरस्त कर दिया है। अधिकरण के प्रशासनिक सदस्य सुखलाल भारती ने आदेश जारी करते हुए उनकी निर्देश याचिका स्वीकार कर ली।
डॉ. प्रधान पर आरोप था कि स्थानांतरण आदेश के बाद उन्होंने नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया और पुरानी तैनाती स्थल की उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर करते रहे। इसके अलावा 28 अप्रैल 2005 को आयुक्त के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित रहने का आरोप भी लगाया गया था। इन आरोपों के आधार पर शासन ने उनकी दो वेतन वृद्धियां दो वर्ष के लिए रोकने और परिनिंदा की सजा दी थी।
अधिकरण ने पाया कि जांच अधिकारी ने डॉ. प्रधान को आरोपों में दोषी नहीं पाया था। इसके बावजूद दंडाधिकारी ने उन्हें सजा दी। साथ ही, दंडादेश पारित करते समय उनके स्पष्टीकरण में उठाए गए तथ्यों पर समुचित विचार नहीं किया गया।
अधिकरण ने कहा कि डॉ. प्रधान ने 28 अप्रैल से दो मई 2005 तक आकस्मिक अवकाश का आवेदन दिया था, जिसे अधीक्षक की ओर से अनुमोदित कराया गया था। इस कारण निरीक्षण के दिन उनकी अनुपस्थिति को ध्यान में रखे बिना सजा देना उचित नहीं था। अधिकरण ने आठ जुलाई 2008 के दंडादेश को अपास्त कर दिया।