प्रदेश के किसानों एवं मजदूरों ने रविवार से तीन दिन के लिए राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में महापड़ाव डाल दिया है। पहले ही दिन प्रदेशभर से आए किसानों ने अपनी ताकत का एहसास कराया। केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र टेनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की। किसान गन्ना मूल्य बढ़ाने, भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने सहित 25 सूत्री मांगों को लेकर महापड़ाव पर हैं। सरकार को संबोधित मांगों से संबंधित ज्ञापन 28 को सौंपेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा व केंद्रीय श्रम संगठनों औद्योगिक फेडरेशनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महापड़ाव को लेकर राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में सुबह 10 बजे से ही किसानों- मजदूरों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। विभिन्न जिलों से हाथ में लाल और हरा झंडा लिए किसान सरकार विरोधी नारा बुलंद करते हुए पांडाल में पहुंचे। कुछ के हाथों में खाद, बीज सस्ती करो, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करो जैसे नारे लिखी तल्खियां थीं। यहां जुटे किसानों का शरीर जर्जर तो हक के लिए हौंसला बुलंद दिखा। यही वजह है कि सर्दी होने के बाद भी सैकड़ों किसान रात में भी ईको गार्डन में डटे हैं। वे 28 तक यहीं रहेंगे।
जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार को किसान व मजदूर विरोधी बताते हुए उनकी नीतियों को कारपोरेट परस्त और सांप्रदायिक गठजोड़ युक्त बताया। इस बात पर भी नाराजगी जताई कि दिल्ली बार्डर पर हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान सभी फसलों की एमएसपी की गारंटी, बिजली बिल वापसी आदि पर किए गए वादे से सरकार पलट गई। कॉर्पोरेट हितों में श्रम संहिताओं को थोपकर मजदूर वर्ग के अधिकारों को छीनने की साजिश की जा रही है। सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में बेचा जा रहा है। संविधान और जनतन्त्र पर हमला हो रहा है।
सभा को केंद्रीय नेता पी कृष्ण प्रसाद, अशोक सिंह, अशीष मित्तल, जयप्रकाश नारायण, राजवीर सिंह जादौन, प्रेमनाथ राय, बालेन्द्र कटियार, चंद्रशेखर, विजय विद्रोही, मीना आर्या, बैचन अली, इम्तियाज बेग, विमल त्रिवेदी, कमलेश यादव आदि ने संबोधित किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के महामंत्री बीएल भारती ने मौके पर पहुंच कर महापड़ाव का समर्थन किया। महापड़ाव की अध्यक्षता संयुक्त मंडल में शामिल एचएन तिवारी, डॉ. बीके सिंह, बीना गुप्ता, उमाशंकर मिश्रा, धर्म देव, अफरोज आलम, राजेंद्र यादव, भारत सिंह, धर्मपाल ने की। संचालन उत्तर प्रदेश किसान सभा को महामंत्री मुकुट सिंह, अखिल भारतीय किसान महासभा के महामंत्री ईश्वरी प्रसाद ने किया।
ये हैं प्रमुख मांगें
- महंगाई पर रोक, तेल व गैस की कीमत कम करें। भोजन, दवा आदि को जीएसटी मुक्त करें।
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के तहत सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी हो, भूमि अधिग्रण पर रोक लगे।
- आवारा पशुओं से किसानों की फसलों की रक्षा की जाए। पशु व्यापार पर लगे रोक को हटाया जाए।
- नई पेंशन स्कीम रद्द हो। पुरानी पेंशन बहाल हो।
- किसानों एवं खेत मजदूरों के लिए 10 हजार रुपया प्रतिमाग पेंशन लागू हो। सभी कर्ज माफ हों।
- श्रम का आकमिस्मकीकरण व ठेकाकरण बंद हो।
- आयुटसोर्सिंग संविदा ठेका मजदूरों को नियमति किया जाए।
- बटाईदार किसानों का निबंधन हो
- रिक्त स्वीकृत सरकराी भरों को भरा जाए। अग्निपथ योजना वापस ली जाए।
- पीएम फसल बीमा वापस हो। सभी फसलों के लिए व्यापक फसल बीमा लागू हो।
- मनरेगा का शहरों तक विस्तार हो। प्रतिवर्ष 200 दिन काम और प्रतिदिन 600 रुपया मजदूरी दी जाए।
- सूखा व जल प्रबंधन के लिए ठोक नीति बने।
- काम के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाए। राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपया प्रतिमाह घोषित करें।
- बिजली संशोधन विधेयक 2022 को वापस लें। किसानों को खेती के लिए मुफ्त बिजली दें। सभी परिवारों को तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली दें।
- औद्यिोगिक त्रिपक्षीय समिति का गठन हो।
- पोस्ते की खेती के लिए लाइसेंस जारी किया जाए।
- खाद्य सुरक्षा की गारंटी हो और जनवितरण प्रणाली को सर्वव्यापी बनाया जाए।
- किसानों को अनुदानित दर पर सही समय पर खाद, बीज व कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएं।
-वन अधिकार कानून को सख्ती से लागू किया जाए। वन संशोधन विधेयक 2023 वापस लें।
- सार्वजनित क्षेत्र के उद्यमों एवं सरकारी विभागों का निजीकरण बंद हो।
- निर्माण श्रमिकों को ोकल्याण निधि से योगदान दे। ईएसआई कवरेज और ई श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सभी श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिले।
- प्रदेश के गन्ना किसानों के सभी बकाए ब्याज सहित भुगतान किया जाए। गन्ने का मूल्य 500 रुपया प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू किया जाए।
- घरेलू कामगारों और होम बेस्ड वर्कर्स को मजदूर का दर्जा दिया जाए। उनके लिए बोर्ड बनाया जाए।
- लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले बंद करों। विरोधियों, पत्रकारों व जन आंदोलन को दबाने के लिए ईडी, सीबीआई एवं यूएपीए का दुरुपयोग बंद करें।