निजी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज से बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की फर्जी डिग्री मामले में यूपी के दो छात्रों की डिग्री फर्जी मिली है। कॉलेजों जरिए रजिस्ट्रार आफिस में दो छात्रों के दस्तावेज फर्जी होने की रिपोर्ट भेजी है। इससे विभाग में खलबली मची है। वहीं तीन छात्रों के रिकार्ड अभी तक नहीं मिले हैं।
अंदेशा जताया जा रहा है कि बाकी तीनों छात्रों के रिकार्ड भी फर्जी हैं। रजिस्ट्रार आफिस के जरिए फिर से कॉलेजों को रिमाइंडर भेजकर जवाब मांगा गया है। अफसरों का कहना है फर्जी डिग्री मामले में विधिक राय लेने बाद मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। ऐसे में पूरा सिस्टम कटघरे में है।
एमबीबीएस, आयुर्वेद, यूनानी व होम्यापैथिक विधा में दाखिले के लिए वर्ष 2016 से नीट परीक्षा अनिवार्य है। इसके बाद भी कई कॉलेजों में बिना नीट परीक्षा छात्रों का दाखिला लिया गया था। अमर उजाला ने 13 अक्टूबर के अंक में प्रदेश के अलग-अलग निजी मेडिकल कॉलेज में पांच छात्रों की डिग्री व इंर्टनशिप में फर्जीवाड़ा होने का आरोप लगाकर खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद आयुष मंत्रालय भी सख्त हो गया था।
भारतीय चिकित्सा पद्वति राष्ट्रीय आयोग ने अपर मुख्य सचिव आयुष विभाग मदन लाल मीना को पत्र भेजकर प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। पांचों छात्र विभाग के राडार पर थे। पांचों छात्रों ने आयुर्वेद- यूनानी व तिब्बती चिकित्सा पद्वति बोर्ड कार्यालय में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। श्रीराम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल मेरठ के दो छात्र राजेश व विवेक ने कॉलेज की डिग्री व इंटर्नशिप के फर्जी दस्तावेजों के सहारे पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।
रजिस्ट्रार जरिए कॉलेज से दोनों छात्रों का रिकार्ड मांगा गया था। कॉलेज ने दोनों छात्रों के कॉलेज से पढ़ाई न किए जाने का दावा किया है। आयुर्वेद- यूनानी व तिब्बती चिकित्सा पद्वति बोर्ड कार्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश वर्मा ने दो छात्रों की डिग्री फर्जी मिली है। बाकी बचे तीन छात्रों का रिकार्ड न मिलने पर रिमाइंडर भेजा गया है। बताया विधिक राय लेने बाद आगे की कार्रवाई होगी।