शुक्रवार को मारे गए छापों में पिनटेल ग्रुप के अलावा बाकी कंपनियों की पड़ताल की गयी, जिसमें सामने आया कि जमीनों को खरीदने के लिए बोगस कंपनियां बनाई गयी थी।
लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर 200 एकड़ की टाउनशिप बनाने वाली बेनामी कंपनी हमसफर डीलर्स के कंसोर्टियम की बाकी सात कंपनियां आयकर जांच में बोगस पाई गयी हैं। हमसफर डीलर्स और उसकी सहयोगी कंपनियों के छह शहरों के 25 ठिकानों पर शुक्रवार को शुरू हुई छापेमारी के 24 घंटे बाद समाप्त हो गयी । केवल दिल्ली के कुछ ठिकानों पर आयकर विभाग की टीमों की जांच जारी है। इस दौरान 25 लाख रुपये नकद और कंपनियों के फर्जीवाड़े के अहम सुबूत बरामद हुए हैं ।
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आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि टाउनशिप के लिए जमीनें खरीदने को हमसफर डीलर्स के असली संचालक हवाला कारोबारी नंदकिशोर चतुर्वेदी ने कई कंपनियों का कंसोर्टियम बनाया था, जिनमें मुख्य रूप से रोहित सहाय, रवि पांडेय, रजनी कांत मिश्रा और उनके कुनबे के स्वामित्व वाले पिनटेल ग्रुप की आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों के अलावा केशरदेव पोद्दार रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, पॉनटिक इंफ्रा इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, तिलिचो इंफ्रा डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, तेरे नार्म्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ट्रपेजियम इंफ्रा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल थी।
शुक्रवार को मारे गए छापों में पिनटेल ग्रुप के अलावा बाकी कंपनियों की पड़ताल की गयी, जिसमें सामने आया कि जमीनों को खरीदने के लिए बोगस कंपनियां बनाई गयी थी। इन कंपनियों का कोई कारोबार नहीं है और इनको बनाने का मकसद केवल काली कमाई को रीयल एस्टेट में निवेश करना था।
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बेनामी एक्ट में जब्त होंगी संपत्तियां
कंपनियों के बोगस मिलने के बाद आयकर विभाग इन कंपनियों द्वारा खरीदी गयी संपत्तियों को बेनामी एक्ट के तहत जब्त करेगा। आयकर विभाग की इस कार्रवाई से उन निवेशकों को राहत मिलेगी, जिनकी गाढ़ी कमाई हमसफर डीलर्स की टाउनशिप में फंस जाती। आयकर विभाग इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण से भी हमसफर डीलर्स और उसके कंसोर्टियम की कंपनियों के खिलाफ जांच करने के लिए पत्र लिखने की तैयारी में है।