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Lucknow News : आरएसएस दफ्तरों को उड़ाने की धमकी देने वाला निकला पीएफआई का सक्रिय सदस्य, पूछताछ में किया खुलासा

Thu, 23 Jun 2022 08:14 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सात जून को तमिलनाडु से गिरफ्तार राज मोहम्मद ने एटीएस द्वारा रिमांड पर हुई पूछताछ में बताया है कि 2018 से 2021 तक पीएफआई (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) का सक्रिय सदस्य रहा है। उसके बाद उसने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया जॉइन कर ली।
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विस्तार
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लखनऊ और उन्नाव में आरएसएस कार्यालय को उड़ाने की धमकी देने वाले राज मोहम्मद ने खुद को पीएफआई का सक्रिय सदस्य बताया है। सात जून को तमिलनाडु से गिरफ्तार राज मोहम्मद से एटीएस द्वारा रिमांड पर हुई पूछताछ में इसका खुलासा हुआ है। राज मोहम्मद ने पूछताछ में बताया है कि 2018 से 2021 तक पीएफआई (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) का सक्रिय सदस्य रहा है। उसके बाद उसने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया जॉइन कर ली। एटीएस के सूत्रों का कहना है कि राज मोहम्मद अधिकतर सवालों का जवाब देने से बचता रहा। धमकी देने के सिलसिले में उसने बताया कि देश का माहौल खराब करने के लिए उसने यह षडयंत्र रचा था।

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सूत्रों ने बताया कि राज मोहम्मद ने एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया हुआ था। इस ग्रुप में लोगों को वह लिंक के सहारे एड करता था। इसी लिंक के सहारे उसने लखनऊ और उन्नाव में आरएसएस के लोगों को एड किया था और लोगों को धमकी दी थी। यूपी के लखनऊ व उन्नाव कार्यालय के अलावा कर्नाटक में आरएसएस के 4 मुख्यालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। जिसके बाद लखनऊ के मड़ियांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। एटीएस ने इसकी छानबीन शुरू की तो फोन करने वाले की लोकेशन तमिलनाडु में मिली। एटीएस ने बीते सात जून को उसे गिरफ्तार कर लिया था।

एटीएस के सूत्रों ने बताया कि राज मोहम्मद ने कंप्यूटर टेकभनालॉजी में डिप्लोमा किया हुआ है। उसके मोबाइल में कुल 15 व्हाट्स एप ग्रुप मिले हैं जिसमें वह खुद एडमिन है। अलग अलग ग्रुपों में यूएसए, लेबनान, इज्राइल, बेलारूस, सऊदी अरब समेत कई देशों के लोगों को जोड़ा हुआ है। इन सभी व्हाट्स एप ग्रुप में किस तरह की बातें होती थीं, इसका उद्देश्य क्या था? इसकी जानकारी हासिल करने के लिए मोबाइल को डाटा रिकवरी के लिए फारेंसिक लैब भेजा गया है।
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क्यों चुनाव यूपी और कर्नाटक?

पूछताछ में राज ने खुलासा किया है कि कर्नाटक में हिजाब विवाद के कारण वहां के और यूपी में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के कारण यूपी में स्थित आरएसएस कार्यालय को चुना था। धमकी देने के लिए इंटरनेट के सहारे आरएसएस के कार्यालयों के पदाधिकारियों के नाम हासिल किए और वाइस टाइपिंग के जरिए तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में लोगों को मैसेज भेजा गया। एटीएस पता लगा रही है कि इस पूरी कुराफात में राज मोहम्मद अकेले ही है या फिर उसका कोई और भी सहयोगी है? मोबाइल से डाटा रिकवरी होने के बाद कई और चीजें सामने आ सकती हैं।

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