विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार नई दरों के निर्धारण से पहले आयोग को जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बिजली कंपनियों ने जहां दरें बढ़वाने और स्लैब परिवर्तन के लिए जोर लगा रखा है, वहीं उपभोक्ता संगठन भी दरों में वृद्धि के विरोध की तैयारी में जुटे हैं।
प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग मंगलवार से वर्ष 2022-23 के लिए बिजली दरों पर सुनवाई करने जा रहा है। 24 जून तक जनसुनवाई करने के बाद 27 जून को राज्य सलाहकार समिति की बैठक में नई दरों पर चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आयोग जुलाई में नई दरों का एलान कर देगा।
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विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार नई दरों के निर्धारण से पहले आयोग को जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बिजली कंपनियों ने जहां दरें बढ़वाने और स्लैब परिवर्तन के लिए जोर लगा रखा है, वहीं उपभोक्ता संगठन भी दरों में वृद्धि के विरोध की तैयारी में जुटे हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर आयोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनसुनवाई करके बिजली दरों के बारे में सभी हितधारकों की राय जानेगा।
उधर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को नियामक आयोग में स्लैब परिवर्तन को खारिज करने के लिए एक याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव स्वीकार करते समय नियामक आयोग ने स्पष्ट आदेश दिया था कि अगर बिजली कंपनियां स्लैब परिवर्तन पर चर्चा करना चाहती हैं तो उन्हें बिजली दर के प्रस्ताव के साथ स्लैब परिवर्तन का पूरा ब्योरा समाचार पत्रों में प्रकाशित कराना होगा। उपभोक्ताओं की आपत्तियाें व सुझाव के बाद ही उस पर आगे कार्यवाही हो सकती है। उनका कहना है कि पहले भी बिजली कंपनियों ने बगैर सार्वजनिक प्रकाशन के स्लैब परिवर्तन को चोर दरवाजे लागू कराने की कोशिश की थी। दो साल से इसे खारिज किया जा रहा है। ऐसे में आयोग में स्लैब परिवर्तन पर सुनवाई किया जाना असंवैधानिक है।
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वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता परिषद बिजली कंपनियों पर निकल रही उपभोक्ताओं की 22,045 करोड़ रुपये की देनदारी के एवज में दरों में कमी कराने के लिए पूरा जोर लगाएगा। उपभोक्ताओं से बातचीत के बाद परिषद ने आपत्तियां व सुझाव तैयार किए हैं। इसे सुनवाई के दौरान आयोग के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।