हर कोई यह सोच रहा है कि 2016 के अंत तक लखनऊ मेट्रो शुरू हो जाएगी। इसी सोच को अमली जामा पहनाने के लिए अखिलेश सरकार के साथ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बेहद सर्तक हैं।
एलएमआरसी के विभिन्न कामों की धीमी गति पर सोमवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन का गुस्सा फूट पड़ा। न निजी जमीन अब तक मिल सकी है और न ही विभिन्न सरकारी एजेंसियां धन उपलब्ध करा रही हैं।
मजे की बात तो ये है कि, अब तक निजी जमीन लेने के लिए अर्जन कमेटी की एक बैठक तक नहीं हुई है, जिस पर मंडलायुक्त लखनऊ को तत्काल निर्देशित किया कि वे अर्जन कमेटी की पहली मीटिंग तत्काल लें।
सभी एजेंसियों और विभागों के अधिकारियों को मुख्य सचिव की ओर से स्पष्ट कर दिया गया कि इस परियोजना में जरा सी भी शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सोमवार को शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय में लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिए हैं कि मेट्रो स्टेशन्स तथा अन्य उपयोगों केलिए निजी स्वामित्व की भूमि को समझौते के आधार पर क्रय करने में आ रही कठिनाइयों के निवारण के लिए आयुक्त, लखनऊ मंडल की अध्यक्षता में गठित समिति तत्काल बैठक कर भूमि को एलएमआरसी को उपलब्ध कराए।