राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना के आगाज को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने एक माह का विलंब करने की इजाजत अधिकारियों को दे दी।
उन्होंने आवास विभाग के अधिकारियों की बैठक में कहा कि हर हाल में अक्तूबर में मेट्रो परियोजना के काम शुरू करा दिया जाए।
जबकि सरकार विधानसभा में जानकारी दे चुकी है कि सितंबर में निर्माण का आगाज होगा।
उनका यह बात कहना तब बहुत महत्वपूर्ण हो गया है जबकि, एलएमआरसी के प्रमुख सलाहकार ई. श्रीधरन ने हाल ही में कहा था कि परियोजना पर एक दिन का विलंब 50 लाख रुपये का बजट बढ़ाएगा।
मुख्य सचिव ने कानपुर और आगरा में भी जल्द ही मेट्रो का डीपीआर बनाने का निर्देश दिया।
मुख्य सचिव आलोक रंजन शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय में सोमवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि लखनऊ मेट्रो का काम हर हाल में अक्तूबर से शुरू हो जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लखनऊ शहर के अतिरिक्त कानपुर और आगरा तथा अन्य शहरों में भी मेट्रो के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए।
फिलहाल अभी कानपुर ने फिजीबिलिटी रिपोर्ट आईआईटी कानपुर से बनवाने का आगाज किया है।
तो लगेगा 15 करोड़ रुपये का झटका
ई. श्रीधरन ने हाल ही में दो बातें कहीं। पहली बात यह है कि हर हाल में सितंबर से मेट्रो प्रोजेक्ट का काम राजधानी में जमीन पर उतर आएगा।
दूसरी बात उन्होंने अपने पिछले दौरे में 23 जुलाई को कही थी कि, मेट्रो परियोजना में एक भी दिन की देरी रोजाना 50 लाख रुपये का झटका देगा।
ऐसे में मुख्य सचिव अफसरों का जो एक महीने की मोहलत दे रहे हैं, उससे तो परियोजना को करीब 15 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा।
पहले ही इस परियोजना की वजह से राजधानी के प्रत्येक नागरिक पर एक हजार रुपये के विदेशी ऋण का अनुमान लगाया जा रहा है।