- यदि बच्चा देने वाली महिला मानसिक मंदित है तो अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को क्यों नहीं दी?
- मानसिक मंदित महिला को निजी अस्पताल में किसने भर्ती कराया। बच्चा न मिलने पर उसके परिजनों से अस्पताल में पूछताछ क्यों नहीं की?
- दंपती ने अधिकारियों को पत्र देकर दावा किया कि क्षेत्र की एक आशा ने उसे बच्चा दिलाया था, तो आशा ने विभाग से सबकुछ क्यों छिपाया?
- नगराम सीएचसी अधीक्षक को मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे। अधीक्षक ने बच्चे का ऑफलाइन टीकाकरण कराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सीएमओ को भी पूरे प्रकरण की जानकारी नहीं दी, आखिर क्यों?
-- लावारिस या अनाथ बच्चे को कोई भी अपने पास नहीं रखा सकता। इसके लिए गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराना जरूरी है।
-- गोद लेने के लिए इच्छुक दंपती को सबसे पहले केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है।
-- इसके बाद एक विशेष गोद ग्रहण एजेंसी आवेदक के घर पहुंचकर होम स्टडी (सर्वे) करती है। सर्वे में आवेदक की शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।
-- होम स्टडी में योग्य पाने पर दंपती को बच्चे का चयन करने का विकल्प दिया जाता है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।
-- प्रक्रिया पूरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट दंपती के पक्ष में बच्चा गोद लेने का आदेश जारी करते हैं।
मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। बच्चे को जन्म देने वाली महिला का भी पता लगाया जा रहा है। इसमें पुलिस की मदद ली जा रही है। आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ