पूछताछ में अकाउंटेंट ने बयान दिया कि रिप्पन कंसल, उसकी पत्नी शीनू कंसल और आकाश जायसवाल को वैध बिक्री पर कमीशन के रूप में भुगतान किया गया था। लेकिन बिना बिल वाली बिक्री पर भी कमीशन कैश में दिया जाता था, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं रखा गया।
डीजीजीआई की रिपोर्ट के मुताबिक टैक्स चोरी का यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में फैला हुआ है। यूपी और एमपी से माल सप्लाई होता था जबकि नागपुर ऑफिस वित्तीय नियंत्रण का केंद्र था। यह भी सामने आया कि 35 से 40 प्रतिशत बिक्री बिना किसी बिल के होती थी। इनमें मुख्य रूप से कामधेनु लिमिटेड गुरुग्राम (ब्रांड ओनर), मीनाक्षी मेटल इंडस्ट्रीज एलएलपी और मीनाक्षी री-रोलर्स की भूमिका है।
डीजीजीआई की यह कार्रवाई उत्तर भारत में लोहे के व्यापार में चल रहे 'कच्चे बिल नेटवर्क' की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जांच एजेंसी ने कहा है कि आगे ब्रांड मालिक कामधेनु लिमिटेड की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी।