स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना संदिग्ध के मामले में वह परिजनों को शव सौंपने के साथ ही एक फार्म भरवाते हैं। यदि मृतक की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो जिम्मेदारी सुपुर्दगी लेने वाले व्यक्ति की होगी।
सुपुर्दगीनामा की एक कॉपी चिकित्सा अधिकारियों व स्थानीय पुलिस चौकी को भी भेजी जाती है। लेकिन महिला के मामले में पुलिस ने भी जिम्मेदारी नहीं निभाई। मालूम हो कि इससे पहले बीते महीने श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मिले मजदूर के शव के मामले में भी यही लापरवाही देखने को मिली थी।
ट्रॉमा में दम तोड़ने वालों का शव पैक करके परिजनों को सौंपा जाता है। परिजनों से एक पत्र पर हस्ताक्षर कराया जाता है और उन्हें अंतिम संस्कार के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। ज्यादा शव अस्पताल में नहीं रखे जा सकते हैं। इसलिए आईसीएमआर के निर्देश के तहत गाइडलाइन तैयार की गई है। इसी गाइडलाइन के तहत परिजनों को शव सौंपा जाता है। -डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू