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साफ-सफाई के मामले में लखनऊ शर्मिंदा, देश में 269 नंबर पर

Fri, 05 May 2017 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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demo pic - फोटो : amar ujala
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लखनऊ को स्वच्छ करने के तमाम दावों की पोल बृहस्पतिवार को खुल गई जब साफ-सफाई में हमारा लखनऊ फिर फिसड्डी रहा। वर्ष 2015 में स्वच्छता में 220वीं रैंक पर रहा लखनऊ इस साल 434 शहरों में 269वें स्थान पर खिसक गया।
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वह भी तब जबकि ‘ग्रीन लखनऊ, क्लीन लखनऊ’ जैसे स्लोगन के साथ राजधानी को साफ रखने की उम्मीदें परवान चढ़ी थीं। अब हकीकत सामने है, सफाई तो दूर, उल्टे राजधानी और गंदी हो गई है। शहर को साफ रखने का जिम्मेदार नगर निगम पूरी तरह फेल साबित हुआ।

स्मार्ट सिटी मिशन में सबसे पहले चुना जाने वाला लखनऊ स्वच्छता में अब वाराणसी, अलीगढ़, झांसी, कानपुर, आगरा, इलाहाबाद जैसे शहर से भी पीछे हो गया है। 2016 में आई रिपोर्ट में ही लखनऊ में सफाई में सुधार की जरूरत बताई गई थी।
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लखनऊ का यह हाल इसलिए भी है कि लोगों को सफाई नजर नहीं आई। टॉयलेट और कूडे़दान जैसी सुविधाओं में अब भी सुधार की जरूरत है। घरों में टॉयलेट का निर्माण की संख्या और मांग में बड़ा अंतर है।

जनवरी में आई टीम, तीन वर्ग में सर्वेक्षण

demo pic
स्वच्छता सर्वे के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) की टीम जनवरी में आई थी। इसके अलावा सिटीजन फीडबैक और नगर निगम की रिपोर्ट को भी स्वच्छता रैंकिंग का आधार बनाया गया। सर्वेक्षण तीन वर्गों में हुआ...

तीनों वर्गों में पिछड़ी राजधानी
1. म्यूनिसिपल सेल्फ डिक्लरेशन
लखनऊ--444/1000 (मार्क्स)
टॉपर--चंडीगढ़ - 883/1000

2. ऑन साइट ऑब्जर्वेशन
लखनऊ--202/550
टॉपर--भोपाल--483/550

3. सिटीजन फीडबैक
लखनऊ--214/600
टॉपर--502/600

सर्वे में शहर के आधे लोगों ने ही कहा था- बदल रही राजधानी

- फोटो : Amar Ujala
पिछले साल से साफ--61.96 प्रतिशत
मार्केट में मिल जाते हैं डस्टबिन--41.78 प्रतिशत
डोर टू डोर कलेक्शन से संतुष्ट--52.48 प्रतिशत

जरूरत के समय पब्लिक टॉयलेट उपलब्ध--51.26 प्रतिशत
पब्लिक टॉयलेट पिछले साल से बेहतर हुए--43.16 प्रतिशत (3792 लोगों ने दिया था फीडबैक)

मार्केट में डस्टबिन मिलने के लेवल पर सुधार
2017 की आई स्वच्छता रिपोर्ट में शहर के 41.78 प्रतिशत लोगों ने माना है कि अब मार्केट में कूड़ा फेंकने के समय डस्टबिन दिख जाते हैं। 2016 के सर्वे में केवल 12 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि डस्टबिन जरूरत के समय मिल जाते हैं।

नगर निगम के हवा-हवाई दावे

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- 80 प्रतिशत वार्ड में डोर टू डोर कलेक्शन
- 75 प्रतिशत वार्ड में यूजर चार्ज की वसूली
- 75 प्रतिशत चिह्नित कॉमर्शियल एरिया में दिन में दो बार सफाई नहीं

- 50 प्रतिशत वार्ड में वैतनिक कूड़ा उठाने वाले तैनात नहीं
- कूड़ा निस्तारण प्लांट का संचालन हो रहा
- 80 प्रतिशत से अधिक कूड़ा निस्तारण की क्षमता मौजूद
- 75 प्रतिशत वार्ड में कूड़े का सेग्रीगेशन नहीं हो रहा

लेकिन हकीकत यह
- कूड़े का निस्तारण करने के लिए प्लांट नहीं चला।
- डोर टू डोर कलेक्शन 100 प्रतिशत नहीं हुआ।
- शहर खुले में शौच मुक्त नहीं बन पाया।

- डस्टबिन, पब्लिक टॉयलेट की हालत अब भी खराब बनी हुई।
- घरों में और पब्लिक टॉयलेट नहीं बनाए जा सके।

गिरती ही गई स्वच्छता रैंकिंग

डेमो पिक - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2015--220 (476 शहरों का सर्वे)
वर्ष 2016--28 (73 शहरों का सर्वे)
वर्ष 2017--269 (434 शहरों का सर्वे)

लखनऊ शहर--फैक्ट फाइल
28.17 लाख नगर निगम क्षेत्र की आबादी
4255 लोग शामिल हुए 2017 के सर्वे में
860 अंक मिले इस साल 2000 में से
1237 अंक मिले थे वर्ष 2016 में

इन इलाकों में हुआ था सर्वे
चारबाग रेलवे, चारबाग बस स्टैंड, सब्जी मंडी विक्टोरिया पार्क, टीले वाली मस्जिद, चौक कोतवाली, लवकुश नगर बस्ती, मुंशी पुलिया चौराहा, याहियागंज, गोमतीनगर, राजाजीपुरम, पत्रकारपुरम चौराहा, निशातगंज, हनुमान सेतु मंदिर, हजरतगंज, अलीगंज, एयरपोर्ट के पास, आमौसी, अमीनाबाद, एलडीए कालोनी, कैसरबाग, चंदननगर, जीपीओ, आलमबाग, आलमबाग चौराहा।
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ये हाल... नगर निगम में सफाई कर्मचारी 3581, लेकिन शहर गंदा

- फोटो : amar ujala
- 2397 नियमित सफाई कर्मचारी
- 1184 संविदा सफाई कर्मचारी
- 48 करोड़ रुपए सालाना ठेका सफाई का खर्च
- 84 करोड़ रुपए सालाना सफाई कर्मचारियों का वेतन
- 24 करोड़ रुपए सालाना निजी कंपनी को टिपिंग फीस

लगातार दो बार मेयर रहे दिनेश शर्मा, अब डिप्टी सीएम... पर साफ नहीं हुआ शहर
डॉ. दिनेश शर्मा नौ साल तक शहर के मेयर रहे। अब वे सूबे के डिप्टी सीएम हैं। लगातार दो बार मेयर रहे दिनेश शर्मा के कार्यकाल में उनकी ओर से सफाई के लिए कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया। जब शिवरी प्लांट के संचालन पर सवाल उठ रहे थे, वे प्लांट का निरीक्षण करने तक नहीं गए।

वर्ष 2016 की स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के बावजूद वे बड़े-बड़े दावे ही करते रहे। लखनऊ को बाकी शहरों की तुलना में बेहतर भी बता दिया। शिवरी प्लांट के संचालन को बेहतर बनाने की जगह उसके पक्ष में दिखे।

कहते रहे कि लखनऊ नगर निगम अकेला स्थानीय निकाय है जो अपने दम पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चला रहा है। यह जरूर रहा कि जब हाईकोर्ट ने नगर निगम को गंदगी के लिए फटकारा, वे कभी-कभी इलाकों का मुआयना करने जरूर पहुंचे।
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