आतंकवाद के नाम पर भ्रमित बता डी रेडिक्लाइजेशन के नाम पर एजेंसियां गवाह और मुखबिर तैयार करने की कोशिश में हैं। सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद से एनआईए व एटीएस लगातार पकड़े गए लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए प्रताड़ित कर रही हैं।
बुधवार को कानपुर के मोहम्मद आतिफ ने एजेंसियों की घर वापसी के सच को उजागर करते हुए अपना दर्द बयां किया। प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत में आतिफ ने कहा, 7 मार्च के बाद से एटीएस और एनआईए के लोग कभी कानपुर तो कभी लखनऊ कार्यालय बुलाते हैं।
इस वजह से कारोबार बर्बाद हो गया। आतंकी होने के शक में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यहां तक कि सादे कागज पर साइन करवाए गए।