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सैफुल्लाह एनकाउंटर में नए खुलासे, एटीएस पर लग रहे गंभीर आरोप

Thu, 04 May 2017 04:10 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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सैफुल्लाह
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आतंकवाद के नाम पर भ्रमित बता डी रेडिक्लाइजेशन के नाम पर एजेंसियां गवाह और मुखबिर तैयार करने की कोशिश में हैं। सैफुल्लाह एनकाउंटर के बाद से एनआईए व एटीएस लगातार पकड़े गए लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए प्रताड़ित कर रही हैं। 
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बुधवार को कानपुर के मोहम्मद आतिफ ने एजेंसियों की घर वापसी के सच को उजागर करते हुए अपना दर्द बयां किया। प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत में आतिफ ने कहा, 7 मार्च के बाद से एटीएस और एनआईए के लोग कभी कानपुर तो कभी लखनऊ कार्यालय बुलाते हैं। 

इस वजह से कारोबार बर्बाद हो गया। आतंकी होने के शक में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यहां तक कि सादे कागज पर साइन करवाए गए। 
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पेट में पल रहे बच्चे को मारने की धमकी

आतिफ का आरोप है कि कानपुर के रेल बाजार थाने में मनीष सोनकर ने सैफुल्लाह और उसके साथियों से मिले होने की बात कुबूल न करने पर बीवी और उसके पेट में पल रहे बच्चे को मारने के साथ ही परिवार को आतंकवाद के आरोप में फंसाने की धमकी दी। 

एनआईए अधिकारियों ने 18 मार्च को ही फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड ले लिया था। आतिफ के भाई मोहम्मद आकिब का आरोप है कि 24 अप्रैल को महफूज नाम के व्यक्ति ने रास्ते में रोककर सिम के साथ मोबाइल मांगा। न देने पर एटीएस की हिट लिस्ट में मेरा नाम सबसे ऊपर बताया।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि जांच एजेंसियां झूठे सुबूत जुटा रही हैं। हिरासत में लिए गए व्यक्ति का अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलना अधिकार है लेकिन ये अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है। वहीं रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने डी रेडिक्लाइजेशन को एक खास समुदाय के खिलाफ हेट कैंपेन का हिस्सा बताया।
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