‘कुटंब’ में पति-पत्नी के रिश्तों को देतीं नया रंग
आमतौर पर परामर्श केंद्र में पति-पत्नी-परिवार और वकील को साथ बैठा कर सुलह या तलाक जैसे फैसले होते आए हैं। डीसीपी शालिनी के मुताबिक, हम लखनऊ कमिश्नरेट में लागू योजना कुटुंब के तहत पति-पत्नी को अकेले बैठाकर काउंसलिंग करते हैं और उन्हें रिश्तों की अहमियत समझने का मौका देते हैं।
दरअसल ये एक ऐसा रिश्ता है, जिसे भीड़ की नहीं, एक दूसरे के वक्त, दिल की बातें साझा करने की जरूरत होती है। ‘सिंगल टेबल सिंगल केस’ की तर्ज पर काम कर रहे हैं। जबरदस्ती की सुलह नहीं कराते हैं। यह कुटुंब की सफलता ही है कि हमने एक महीने की सीटिंग में 30 परिवारों को जोड़ दिया।
पीड़िता को बयान, मेडिकल, आर्थिक सहायता और काउंसलिग में मदद के लिए लखनऊ कमिश्नरेट में साथी योजना शुरू की गई है। ‘वन विक्टिम-वन ऑफिसर’ व्यवस्था के तहत अब एक पीड़िता के साथ एक ही अधिकारी काम करेगा। जिन मामलों की जांच पूरी हो गई है, उसे फास्ट ट्रैक कोर्ट तक ले जाकर, मामले के निपटारे और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पैरवी योजना शुरू की गई है। सबसे अहम बात की जल्दबाजी में सुबूत जुटाने और उनके इस्तेमाल में कोई चूक न हो जाए, इसे विशेष रूप से ध्यान रखते हुए जांच में विशेष सावधानी बरती जाती है।
सुरक्षित राजधानी हमारी जिम्मेदारी
महिला अपराध व सुरक्षा प्रकोष्ठ की डीसीपी शालिनी, एसीपी श्वेता श्रीवास्तव, एसीपी डॉ. अर्चना सिंह व टीम के सदस्य।
इसे ऐसे समझें, बीते दिन वाराणसी मडुआडीह स्टेशन पर आधी रात को पहुंची लड़की को सवारी वाहन नहीं मिला। उसने सुरक्षा के लिहाज से एस्कॉर्ट की मांग की। 112 पर आई फोन कॉल के बाद उसे एस्कॉर्ट फॉर सिक्योरिटी सेवा उपलब्ध कराई गई।
कहने का आशय है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक एस्कॉर्ट सेवा उपलब्ध कराई जाती है। रात को कहीं भी जा रही महिला को यदि असुरक्षा का डर हो और उसके वाजिब कारण हों तो उसकी सूचना पर एस्कॉर्ट किया जाता है। यदि मदद मांगने वाली के पास वाहन नहीं है तो उसे ऑटो-टैंपो, सवारी वाहन करवा कर घर तक छुड़वाया जाता है। इसकी जरूरत न होने पर जिस सवारी से वह जा रही है, उसकी मॉनिटरिंग की जाती है। एक घंटे के भीतर एस्कॉर्ट सेवा मांगने वाली लड़की से फीडबैक भी लेते हैं।
डीसीपी कहती हैं कि एस्कॉर्ट सेवा का मतलब यह नहीं कि यह आपको ऑफिस से घर या घर से ऑफिस छोड़ने के लिए है। लखनऊ कमिश्नरेट में इस वक्त कुल 90 पीआरवी हैं और इसमें से 10 फीसदी महिला पीआरवी सक्रिय है। त्योहार को देखते हुए इसकी संख्या बढ़ाई जा रही है।
फोन करें या सोशल मीडिया पर 112 को टैग करें
किसी भी लड़की को मदद चाहिए तो 24 घंटे में कभी भी कहीं से भी 112 पर फोन करें या फिर सोशल मीडिया पर मदद मांगे और 112 नंबर को टैग कर दें। आपसे तुरंत संपर्क किया जाएगा।