लखनऊ में ट्रैफिक जाम की समस्या को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2017 में बनी उच्च स्तरीय ट्रैफिक कमेटी को कड़े आदेश दिए कि इस परेशानी पर स्टडी कर प्लान बनाया जाए और फिर समस्या को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने एलडीए की ओर से जाम की समस्या पर बनाई रिपोर्ट को भी देखने का आदेश दिया है। मामले को लेकर गृह विभाग, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एलडीए, नगर निगम, शहरी नियोजन और विकास विभाग और यूपीएसआरटीसी इत्यादि विभागों को मिलाकर हाईकोर्ट के आदेश पर कमेटी बनाई गई थी।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को नींद से जागकर इस समस्या को दूर करना चाहिए। न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने यह आदेश संजय कुमार वर्मा की अवमानना याचिका पर दिया। याची ने कहा था कि 2017 में ही हाईकोर्ट ने लखनऊ में ट्रैफिक की समस्या को लेकर कई आदेश दिए थे, पर उनका अनुपालन नहीं किया गया है। कहा कि कोर्ट के आदेश पर ही उच्चस्तरीय कमेटी बनी थी, जिसकी 2019 के बाद से बैठक ही नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से जाम लगता है। इसके चलते इस प्रचंड गर्मी में छात्रों को घंटों धूप में जाम में फंसे रहना पड़ता है।
वहीं, पहले के आदेश के अनुपालन में लखनऊ पुलिस कमिश्नर की ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि परिवहन निगम की बसें सड़कों पर खड़ी होकर यात्रियों को उतारती-चढ़ाती हैं। यह भी जाम की बड़ी वजह है। बताया कि 1 नवंबर 2021 से 30 अप्रैल 2022 तक ऐसी 464 बसों का चालान किया जा चुका है। ई-रिक्शा के मुख्य मार्गों पर चलने पर 12 मई को रोक लगाने की भी जानकारी दी गई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान परिवहन निगम को यह बताने का आदेश दिया कि परिवहन निगम और लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस की जिन बसों का चालान हुआ है, उनके ड्राइवरों और कंडक्टरों पर क्या कार्रवाई की गई। सुनवाई के दौरान यह भी उम्मीद जताई गई कि आउटर रिंग रोड के पूरी तरह चालू होने पर ट्रैफिक की समस्या से कुछ हद तक निजात मिलेगी।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि आउटर रिंग रोड कब तक पूरी तरह शुरू की जाएगी। सुनवाई के दौरान व्यवसायिक वाहनों के सड़कों पर खड़े हो जाने को जाम की बड़ी वजह बताया गया। इस पर कोर्ट ने इन्हें रोड से दूर खड़े करने की व्यवस्था का आदेश दिया है। मालूम हो कि याचिका में कहा गया कि पांच जुलाई 2017 को हाईकोर्ट ने आदेश पारित करते हुए हाईकोर्ट के आसपास सुचारुरूप से ट्रैफिक चलाने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 जुलाई को नियत कर उस रोज पक्षकारों को आदेश के अनुपालन का नया हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है।