राजधानी लखनऊ स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने मुस्लिम दंपती की याचिका पर लखनऊ के फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के फैसले को पलटते हुए दंपती के तलाक को मंजूरी दे दी। अदालत ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और दंपती के आपसी सहमति को आधार बनाकर अपना फैसला सुनाया।
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न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने अरशद हुसैन की याचिका पर सुनवाई के बाद सात नवंबर को फैसला सुरक्षित कर लिया था। अदालत ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने अपने आदेश में ट्रिपल तलाक को मुस्लिम रिवाजों के अनुरूप न पाकर तलाक की याचिका को नामंजूर कर दिया था। हालांकि दंपती ने आपसी समझौता कर वैवाहिक बंधन को समाप्त करने का फैसला ले लिया था।
तलाक को मंजूरी दे दी
उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में कर्नाटक और केरल उच्च न्यायालय के फैसलों की भी नजीर दी गई थी। उच्च न्यायालय लखनऊ ने आपसी सहमति पर हुए वैवाहिक विच्छेद की सहमति को आधार बनाते हुए और मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर तलाक को मंजूरी दे दी।