मशहूर बॉलीवुड गायिका हर्षदीप कौर की मखमली आवाज का जादू शनिवार शाम लखनवियों के सिर चढ़कर बोला। इस मखमली आवाज में कभी सूफियाना रंग चढ़ा तो कभी बॉलीवुड का तड़का लगा। कभी पंजाब की खुशबू बिखरी तो कभी मोहब्बत का सुरूर छाया। कव्वाली की गूंज भी सुनाई। दर्शक दिल थामकर सुनते रहे और हर्षदीप के साथ थिरकते रहे।
यह नजारा था 94.3 बिग एफएम की ओर से एलडीए कॉलोनी आशियाना स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित हर्षदीप कौर के लाइव कॉन्सर्ट का। अमर उजाला ने इस आयोजन में मीडिया पार्टनर की भूमिका निभाई। सूफी की सुल्ताना नाम से मशहूर हर्षदीप कौर का लखनऊ में यह पहला लाइव कॉन्सर्ट था।
हर्षदीप ने मंच पर पहुंचते ही लखनऊ के दर्शकों का अभिवादन किया। उन्होंने सबसे पहले इक ओंकार सतनाम करता पुरख… गाकर आगाज किया। इसके बाद आज दिन चढ्या तेर अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा... फूल सा है खिला आज दिन रब्बा मेरे दिन ये ना ढले... से सूफियाना रंग मंच पर बिखेरा।
फिर नुसरत फतेह अली का गीत सांसों की माला पे सिमरू मैं पी का नाम... गाकर पूरे प्रेक्षागृह को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद वे पीर वी तू प्यार वी तू दीन वी तू ईमान वी तू... सुनाया। ये जवानी है दीवानी फिल्म में गाया गीत कैसी तेरी खुदगर्जी... कबीरा मान जा... जब हर्षदीप ने गुनगुनाना शुरू किया तो उनके साथ सामने बैठे दर्शकों ने भी साथ में गुनगुनाना शुरू कर दिया।
गाना खत्म हुआ तो दर्शकों ने वंस मोर की फरमाइश की और हर्षदीप ने दोबारा गाया। इसके बाद चार दिनों का प्यार ओ रब्बा लंबी जुदाई..., आज जाने की ज़िद न करो... , सानु इक पल चैन न आवे सजना तेरे बिना..., पिया रे थारे बिना लागे नहीं मेरा जिया रे... से खूब धमाल मचाया। इसके बाद फिल्म राजी का गीत मुड़के न देखो दिलबरो... गाकर दर्शकों को भावुक कर दिया।