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यूके-नार्वे में जॉब करने के बाद अब लखनऊ में ये खास काम कर रही हैं पल्लवी, जानें-इनकी कहानी

Sun, 17 Dec 2017 02:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पल्लवी बिश्नोई - फोटो : amar ujala
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विदेश में पढ़ाई और फिर नौकरी के बाद कुछ ही लोग होते हैं जो अपने वतन लौटते हैं। जो आते भी हैं वो भी किसी खास काम से ही। इनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो विदेश में पढ़ाई कर उसका लाभ अपने शहर या देश की भलाई में लगाते हैं। 
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इन्हीं में से एक हैं लखनऊ की पल्लवी बिश्नोई जो अमेरिका में पढ़ाई और फिर यूके, नार्वे में काम करने के बाद अब लखनऊ में पानी बचाने और जल शोधन प्रक्रिया के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं।

महानगर निवासी और पेशे से इंजीनियर पल्लवी ने इसके लिए एक ऐसी कंपनी बनाई है, जो लोगों को जल शोधन के लिए वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम के आसान उपकरण और इसकी जरूरत के लिए जागरूक करने का काम कर रही है। अपनी इस पहल के लिए पल्लवी को वीमेन एंपावरमेंट क्वेस्ट (डब्ल्यूईक्यू)-2017 में देशभर की 10 महिलाओं में चुना गया।
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डब्ल्ल्यूईक्यू-2017 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, केंद्र सरकार के सहयोग से ग्रास हूपर सेलिब्रेशन इंडिया (जीएचसीआई) व द इंडो यूएस साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम (आईयूएसएसटीएफ) ने देश की ऐसी 10 महिलाओं का चयन किया, जिन्होंने तकनीक की मदद से पर्यावरण और लोगों की मदद के लिए उद्यम खड़े किए। 

बंगलूरू में इसकी प्रक्रिया 17 नवंबर को पूरी हुई है। इनमें लखनऊ की पल्लवी बिश्नोई, सह-संस्थापन व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ), रीयल टाइम रिन्यूएबल्स (आरटीआर) को भी चुना गया। 

पल्लवी अब इन 10 महिलाओं के साथ सिलिकॉन वैली, बंगलूरू में पॉलिसी मेकर्स, स्टेक होल्डर्स और दूसरे उद्यमियों के बीच अपने अनुभव साझा करेंगी। बैठकें अप्रैल और मई 2018 में सिलिकॉन वैली में आयोजित की जाएगी।
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अब तक मिले एक्सपीरियेंस का उपयोग अपने शहर में करूंगी

पल्लवी बिश्नोई - फोटो : amar ujala
पल्लवी का कहना है कि मणिपाल यूनिवर्सिटी से कैमिकल इंजीनियरिंग में बीई के बाद 2012 में सिविल इंजीनियरिंग में एमएससी कोर्स यूएसए की वर्जीनिया पॉलीटेक्निक  इंस्टीट्यूट एंड स्टेट यूनिवर्सिटी से किया। इससे पहले आईआईटी कानपुर में प्रोजेक्ट फैलो के रूप में काम किया। 2015 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली से एनवायरमेंट लॉ एंड पॉलिसी में पीजी डिप्लोमा भी किया।

इस बीच यूके, नार्वे और यूएसए में डीसी वाटर, थेम्स वाटर, नॉर्वेयन वाटर क्लस्टर, कैंबी आईएनसी, वर्जीनिया टेक जैसी संस्थाओं के साथ काम करने का मौका मिला। यहां मिले अनुभव को अपने शहर में उपयोग करने के लिए घर वापसी की। आरटीआर को बनाए हुए चार साल हो गए हैं। इसे मैं एक दिन भारत में पानी के क्षेत्र में सबसे ऊपर पहुंचाना चाहती हूं।

हमारे यहां पानी नहीं सोच की कमी
पल्लवी का कहना है कि भारत में पानी की कमी नहीं है। यहां जल प्रबंधन के लिए सोच की कमी है। आने वाले समय में पानी के संकट से हमें जूझना होगा। पानी प्रबंधन के लिए तकनीक का उपयोग आज के समय की जरूरत बन गया है।

आरटीआर एक प्रक्रिया पर काम करता है, जिसमें पब्लिक, सरकार और इंडस्ट्री तीनों को हम साथ लेकर आए हैं। यही भारत को पानी की कमी वाला देश बनने से रोकेगा। तकनीक से ही वाटर ट्रीटमेंट कर जल प्रबंधन किया जा सकता है।

भाई के साथ ही बनाई कंपनी
पल्लवी का कहना है कि तकनीकी रूप से इस काम को करने के लिए मैं प्रशिक्षित हूं, लेकिन मुझे प्रबंधन के लिए भी एक सहयोग चाहिए था। इसके लिए मेरा भाई सिद्धार्थ सामने आया। वह खुद सिडनी ऑस्ट्रेलिया से फाइनेंस में एमबीए है।

अब वह कंपनी के प्रशासनिक और वित्तीय मामले देखता है। इसमें बिजनेसमैन पापा आरपी सिंह और अलीगंज में गवर्नमेंट गर्ल्स डिग्री कॉलेज में फैकल्टी मां डॉ. रश्मि बिश्नोई का भी पूरा सहयोग मिला, जिससे काम को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिली।
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