राजधानी लखनऊ के अलीगंज हादसे की जांच के लिए गठित एसआईटी की टीम मंगलवार को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंची। टीम ने करीब एक घंटे तक ट्रॉमा सेंटर में रहकर अधिकारियों और डॉक्टरों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह समेत अन्य अधिकारियों से बातचीत कर हादसे के बाद घायलों के पहुंचने और इलाज की प्रक्रिया को समझा गया। घायलों व डॉक्टरों से अहम सुराग जुटाए।
एसआईटी ने अधिकारियों से पूछा कि घटना के बाद मरीज किस हालत में ट्रॉमा सेंटर लाए गए थे। घायलों के शरीर पर किस तरह की चोटें थीं। उन्हें किस स्तर की चिकित्सकीय जरूरत थी। इसके साथ ही हादसे में मृत लोगों के शव किस स्थिति में ट्रॉमा सेंटर लाए गए थे? इसकी भी जानकारी ली गई। टीम ने शवों पर चोट, जलने या अन्य किसी तरह के निशान से जुड़े तथ्यों को भी जांच के दायरे में रखा।
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अधिकारियों ने एसआईटी को बताया कि हादसे के बाद ट्रॉमा सेंटर में घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। घटना में घायल दो लोग अभी भी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। टीम ने इनमें से एक घायल लवप्रीत से बातचीत कर घटना के संबंध में जानकारी हासिल की। इसके बाद एसआईटी तीसरे तल पर पहुंची, जहां आईसीयू में भर्ती युवक का हाल जाना और उससे भी घटना से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की।
अग्निकांड की जानकारी कब हुई? बचाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए। घटना के वक्त सेंटर में कितने लोग मौजूद रहे। जांच टीम ने सोमवार रात इलाज के बाद डिस्चार्ज होकर घर जा चुके युवक-युवतियों को भी बुलाया। उनसे हादसे के पहले और बाद की पूरी स्थिति के बारे में सिलसिलेवार जानकारी ली गई।
टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने क्या देखा। एसआईटी अब ट्रॉमा सेंटर से जुटाए गए मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टरों की जानकारी और घायलों के बयान के आधार पर आगे की जांच करेगी। हादसे की हर कड़ी को जोड़ने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है।