लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच में बिल्डिंग मालिक द्वारा बिजली सुरक्षा निदेशालय की फर्जी एनओसी बनाने का आरोप सामने आया है। सहायक निदेशक की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। जांच में एनओसी के दस्तावेज, हस्ताक्षर और डिस्पैच नंबर फर्जी पाए गए।
अलीगंज अग्निकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। बिल्डिंग के मालिक अलीगंज सेक्टर डी निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला ने बिजली सुरक्षा निदेशालय से फर्जी एनओसी बनाई थी। यह आरोप निदेशालय के सहायक निदेशक आलोक शुक्ला ने लगाया है। उनकी तहरीर पर अलीगंज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
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सहायक निदेशक आलोक शुक्ला का कहना है कि 22 जून को हुए अग्निकांड की जांच उन्हें मिली थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि वीरेंद्र ने बिल्डिंग की फर्जी एनओसी बनाई थी। यह एनओसी 24 जून 2016 से डिस्पैच थी, जबकि कार्यालय के अभिलेखों में दर्ज डिस्पैच नंबर फर्जी एनओसी से अलग था।
पेपर की डिजाइन भी अलग थी
एनओसी पर दर्ज हस्ताक्षर भी तत्कालीन सहायक निदेशक पीके निगम के हस्ताक्षर से भिन्न थे। एनओसी में छपा फॉन्ट साइज, लिखावट व पेपर की डिजाइन भी अलग थी। आलोक शुक्ला का कहना है कि आरोपी बिल्डिंग मालिक ने तत्कालीन अधिकारी के हस्ताक्षर निदेशालय को भ्रमित करने के मकसद से बनाए थे। फिर उसने एनओसी तैयार कर ली।
इसके बाद निगम से कनेक्शन ले लिया। वहीं, इंस्पेक्टर ध्रुव कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी बिल्डिंग मालिक को जेल भेजा जा चुका है। सहायक निदेशक की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। उनसे फर्जीवाड़े संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। मामले की विवेचना दरोगा अभय प्रताप सिंह कर रहे हैं। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।