एनजीटी के आदेश के बाद गोमती किनारे चल रहीं निर्माण परियोजनाएं कानूनी जांच के दायरे में आ गई हैं। संबंधित एजेंसियों को साबित करना होगा कि निर्माण के लिए वैधानिक मंजूरियां ली गई हैं और कार्य वर्ष 2016 के नियमों के अनुरूप है। पुल, सड़क और तटबंध जैसी परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की पूर्व स्वीकृति का मुद्दा भी जांच का हिस्सा रहेगा। अब नदी के किनारे चल रहे निर्माण कार्यों की वैधता की जांच एनजीटी की निगरानी में होगी।
इन योजनाओं पर होगा असर
- ग्रीन कॉरिडोर योजना के फेज-3 के तहत पिपराघाट से शहीद पथ तक करीब छह किमी लंबे हिस्से में गोमती के किनारे तटबंध चौड़ा करने, मिट्टी की भराई और चार लेन सड़क का हो रहा है निर्माण।
- फेज-4 के तहत शहीद पथ से किसान पथ तक करीब 6.3 किमी हिस्से में नदी किनारे तटबंध और चार लेन सड़क बनाई जा रही है।
- गोमतीनगर एक्सटेंशन स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के सामने गोमती नदी फेसिंग की जमीनें बिल्डरों को दे दी गई हैं। यहां बन रही बहुमंजिला इमारत पर भी आदेश का असर पड़ेगा।