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क्या जूतों से बैंक लुटेरों-हत्यारों तक पहुंच पाएगी पुलिस?

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डालीगंज में एचडीएफसी बैंक के एटीएम बूथ पर तीन लोगों की दिनदहाड़े हत्या और 50 लाख की लूट की तीन दिन की तफ्तीश बेनतीजा रही है। खूनी लुटेरों की धुंधली तस्वीर के अलावा कुछ भी पुलिस के हाथ नहीं लगा है।
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सधे अंदाज में दुस्साहसिक वारदात अंजाम देने वाले बदमाशों ने एटीएम बूथ के आसपास मोबाइल इस्तेमाल नहीं किया था। इसके चलते इलेक्ट्रानिक सर्विलांस से भी कोई सुराग नहीं लगते देख पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज व लोगों को बयान के आधार पर लुटेरों का रूट चार्ट तैयार कर रही है।

गनमैन अरुण सिंह, अवनीश शुक्ला व कर्मचारी अनिल सिंह की हत्या के बाद 50.50 लाख रुपयों से भरा बक्सा लूटकर भागे बाइक सवार बदमाशों का तीसरे दिन रविवार को भी कोई सुराग नहीं लगा है। पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने वाले बदमाशों ने मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया था।
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इसके चलते इलेक्ट्रानिक सर्विलांस से कुछ खास न मिलते देख अफसरों ने सीसीटीवी फुटेज व जमीनी तहकीकात के आधार पर कड़ी से कड़ी जोड़नी शुरू की हैं। इसी आधार पर रूट मैप तैयार किया जा रहा है।

एटीएम बूथ के सामने के सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के गहन निरीक्षण के बाद डालीगंज से बाबूगंज के रास्ते एटीएम बूथ के सामने से होकर यूनिवर्सिटी हॉस्टलवाले मार्ग से गोमती बंधा व नदवा मार्ग से डालीगंज पुल तक का रूट चार्ट बनाया गया है। वहीं एक टीम को लुटेरों के निरालानगर मार्ग से भागने का शक है।

जूते से सुराग लगने की उम्मीद

हसनगंज कोतवाली व क्राइम ब्रांच के सिपाहियों की टीम जूतों के आधार पर खूनी लुटेरों का पता लगाने के लिए इलाके में टोह ले रही है। सीसीटीवी फुटेज में चेहरे भले ही स्पष्ट न हों पर एक जैसे जूते साफ नजर आ रहे हैं। लोगों से फुटेज में नजर आ रहे जूते पहनने वालों के बारे में पूछा जा रहा है।

खूनी लुटेरों का कोई सुराग न लगता देख हसनगंज पुलिस ने रविवार को पूरे इलाके में किराएदारों के सत्यापन का अभियान चलाया और करीब ढाई सौ घरों को खंगाला।

डालीगंज, हसनगंज चरही, कुतुबपुर, मुकारिमनगर, बरौलिया, मायानगर, बाबूगंज व लविवि के आसपास किराए पर रहने वाले युवकों पर विशेष नजर रही। जिन किराएदारों के कमरे पर ताला लटका मिला। उनके बारे में मकान मालिक से गहन तहकीकात की गई और किराएदार का मोबाइल नंबर मालूम कर छानबीन की गई।

क्राइम ब्रांच की एक टीम लुटेरों की टोह लेने के इरादे से रविवार को जिला जेल पहुंची। मुखबिरों की मदद से विभिन्न अपराधियों से संपर्क करके राज मालूम करने की कोशिश की। उनसे जमानत पर छूटे साथियों के बारे में पूछताछ की गई। इसके अलावा चार बड़े अपराधियों के नजदीकी लोगों पर नजर रखकर गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है।
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रैकी के दौरान चेहरा नजर आने की आस

एसटीएफ के अफसरों का मानना है कि खूनी लुटेरों ने रैकी के बाद वारदात अंजाम दी। इसके चलते पिछले दिनों एटीएम में कैश लोड होने की तारीख व समय के आधार पर आठ दुकानों के एक हफ्ते के सीसीटीवी के फुटेज का रिकॉर्ड कब्जे में लिया गया है। उम्मीद है कि रैकी के दौरान बदमाशों ने चेहरा छुपाने की जरूरत नहीं समझी होगी। टीम ने तीन काली मोटरसाइकिलों पर गुजरे लोगों को संदेह के घेरे में लिया है।

संगीन वारदात के दौरान एटीएम बूथ में दुबके रहे कर्मचारी उदय उर्फ अनुपम व कैश वैन चालक शैलेंद्र तिवारी अभी भी संदेह के घेरे में हैं। दोनों के कॉल डिटेल खंगालने के साथ पूछताछ में जुटी पुलिस ने उनके रिश्तेदारों तक की कुंडली तैयार कर डाली है। इनमें से कई लोगों से पूछताछ के साथ उनके बयान की सच्चाई की तहकीकात भी गई है।

दुस्साहसिक वारदात अंजाम देने वाले बदमाशों ने न तो मोबाइल का इस्तेमाल किया और न ही अपनी पहचान उजागर होने दी। सीसीटीवी कैमरे में सिर्फ उनका हुलिया ही कैद हुआ है। इसके आधार पर लुटेरों का पता लगाना भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा है।

इसके अलावा इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के सहारे लुटेरों तक पहुंचने की उम्मीद नजर न आते देख खोजी पुलिसकर्मियों व मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया है। पुराने अपराधियों के बारे में छानबीन के साथ हुलिए के आधार पर लुटेरों का ब्यौरा एकत्र किया जा रहा है।
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