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Bada Mangal: रोचक है लखनऊ में बड़ा मंगल व भंडारे का इतिहास, नवाब वाजिद अली शाह ने की थी शुरुआत

Wed, 14 May 2025 05:55 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ के अलीगंज में स्थित पुराना हनुमान मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी है। नवाब सआदत अली ने अपनी मां आलिया बेगम की इच्छा पर 1798 में इसका निर्माण कराया था।
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बड़े मंगल पर हुए भंडारे का आयोजन। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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अलीगंज का पुराना हनुमान मंदिर लखनऊ में हिंदू-मुस्लिम एकता का जीता जागता उदाहरण है। नवाब सआदत अली के कार्यकाल के दौरान वर्ष 1798 में उन्होंने अपनी मां आलिया बेगम के कहने पर अलीगंज में पुराना श्रीहनुमान मंदिर का निर्माण कराया था। संतान सुख की प्राप्ति होने पर आलिया बेगम ने मंदिर के निर्माण का वादा किया था।

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मंदिर के गुंबद पर चांद की आकृति हिंदू-मुस्लिम एकता की कहानी बयां करती है। मां आलिया बेगम के आदेश पर नवाब सआदत अली ने मंदिर निर्माण के बाद ज्येष्ठ माह में हर मंगलवार को भंडारे का आयोजन शुरू किया था और तब से यहां पर मेला व भंडारा लगने लगा।

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ज्येष्ठ माह में हर मंगलवार (बड़ा मंगल) को नवाब वाजिद अली शाह की ओर से भंडारा कराने को लेकर एक किवदंती यह भी है कि केसर के कुछ व्यापारी लखनऊ आए थे और उनका केसर बिक नहीं रहा था। तब नवाब वाजिद अली शाह ने पूरा केसर खरीद लिया था, वह महीना ज्येष्ठ का था और दिन मंगलवार था। व्यापारियों ने इसी खुशी में यहां भंडारा कराया, तब से यह परंपरा चल पड़ी।
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यह भी कहा जाता है कि अवध के तीसरे नवाब शुजा-उद-दौला (1753-1775 ईस्वी) की दूसरी पत्नी बेगम आलिया को स्पप्न में एक विशिष्ट स्थान का संकेत मिला। जहां हनुमान जी की मूर्ति दबी हुई थी। बेगम आलिया ने उस स्थान की खोदाई का आदेश दिया और जब मूर्ति मिल गई तब उन्होंने उसे हाथी पर ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि हाथी रास्ते में रुक गया। बेगम ने वर्तमान अलीगंज में इसी स्थान पर हनुमान जी का मंदिर बनाने का आदेश दिया, जिसे नवाब सआदत अली ने वर्ष 1798 में बनवाया जो आज भी मौजूद है और तभी से ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को लखनऊ में भंडारे की परंपरा चली आ रही है । 

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