लखनऊ पहुंचे अरशद के मामा ने बताई हकीकत।
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अरशद से पूछताछ में पता चला कि उसकी ननिहाल सराय दरीन संभल है। पुलिस ने पड़ताल कर अरशद के मामा आलम से संपर्क कर उन्हें घटना की जानकारी दी। आलम ने बताया कि बुधवार शाम चार बजे के करीब उन्हें सूचना मिली। रात 12 बजे के आसपास वे अपने भाई और रिश्तेदारों के साथ निकले। सुबह साढ़े पांच बजे नाका थाने पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने पूरी घटना बताई। पुलिस ने आलम से अरशद से मिलने के लिए पूछा ताे उन्होंने इन्कार कर दिया। बोले, जिसने मेरी बहन और भांजियों को मार डाला, उसकी शक्ल नहीं देखनी।
नाका पुलिस ने आलम व उनके परिजनों को कई वीडियो दिखाए। वीडियो देखने के बाद ननिहाल पक्ष हतप्रभ रह गया। आलम के चचेरे भाई फैजान ने बताया कि वीडियो में जो कुछ भी दिखा है, सब झूठ है। अरशद और उसके पिता ने खुद को सही साबित करने के लिए गुमराह किया है। उन्होंने बताया कि परिवार के लोगों की हर दो माह पर अरशद की मां अस्मा से बात होती थी। अस्मा ने कभी भी इस बात का जिक्र नहीं किया था कि वे धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं। यही नहीं, बस्ती वालों से विवाद की बात भी कभी नहीं बताई। घर की महिलाओं की जब भी फोन पर बात हुई तो अस्मा ने किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। अस्मा छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं।
बदर की पहली पत्नी के बारे में जानकारी नहीं
अस्मा के मायके वालों ने बदर उर्फ बदरुद्दीन की पहली पत्नी के बारे में जानकारी से इन्कार किया है। उन्होंने बताया कि बदर का निकाह किससे हुआ था, किसी को नहीं पता। पहली पत्नी जिंदा है या कहीं चली गई, इसके बारे में बदर ने उन्हें कुछ नहीं बताया। खास बात ये है कि पहली पत्नी का नाम भी किसी को नहीं पता है। फैजान के मुताबिक बदर जब बदायूं में रहता था तब उनकी बहन अस्मा का निकाह उससे हुआ था। कुछ दिन बदायूं में रहने के बाद वह संभल में उनके साथ रहा। इसके बाद दिल्ली चला गया। कुछ साल बाद आगरा में शिफ्ट हो गया था।
खाला के निकाह में आठ माह पहले दिल्ली में आए थे बच्चे
फैजान ने बताया कि आठ माह पहले उनकी बहन का निकाह दिल्ली में था। तब अस्मा चारों बच्चों अल्शिया (19), रहमीन (18), अक्सा (16) और आलिया (9 ) के साथ आई थीं। तब भी अस्मा या बच्चों ने किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। बच्चे बहुत खुश थे और कार्यक्रम के बाद आगरा लौट गए थे।
आरोप : बच्चों से फोन पर बात नहीं करने देते थे आरोपी बाप-बेटे
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अरशद के मामा, आलम, दानिश व फैजान ने बताया कि अरशद व बदर बच्चों से फोन पर बात नहीं करने देते थे। शुरू में बच्चों से बात हो जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे बाप-बेटे ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया। बदर के घर की स्थिति ठीक थी। परिजनों के मुताबिक अरशद के ताऊ और चाचा दिल्ली में रहते हैं। पुलिस अब इनसे भी संपर्क करेगी।
उधार लेकर पहुंचे लखनऊ
आलम ने बताया कि उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। जब उन्हें घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने चचेरे भाई से पांच हजार रुपये उधार लिए। इसके बाद एक गाड़ी बुक कराई। पांच शवों को दफनाने के लिए रुपयों की आवश्यकता पड़ेगी। संभल पहुंचकर चंदा जुटाएंगे, इसके बाद ही शव दफना सकेंगे।