डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में दो दिनी नैक मंथन में मंगलवार को तकनीकी सत्र में उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एक शिक्षक को कड़ी सीख दी। विशेषज्ञ नैक से जुड़ी जानकारी दे रहे थे, उसी समय शिक्षक ने नैक पैरामीटर में बदलाव के सुझाव दिए। इस पर राज्यपाल ने कहा कि नैक ग्रेडिंग या पैरामीटर में बदलने का सुझाव न दीजिए, पहले सीखिए और काम कीजिए। फिर कुछ जरूरी लगे तो बताइएगा।
वहीं समापन सत्र में राज्यपाल ने कहा कि विवि ऐसे युवा तैयार करें, जो विश्व का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने निर्देश दिया कि विवि में नियुक्त नए अध्यापकों और अधिकारियों को भी नैक मूल्यांकन के काम में लगाएं। उन्होेंने सभी कुलपतियों को एक परिवार की तरह काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अगली बार कुलपति और शिक्षक अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ ही आएं।
अपर मुख्य सचिव राज्यपाल महेश गुप्ता ने कहा कि सबसे पहले विश्वविद्यालयों को नैक की वेबसाइट के अध्ययन करने की जरूरत है। बिना वेबसाइट को देखे नैक मूल्यांकन के मानदंडों को पूरा नहीं किया जा सकता है। इसके पहले विभिन्न तकनीकी सत्रों में नैक विशेषज्ञों ने नैक मानदंडों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें महर्षि मार्कंडेश्वर विवि अंबाला के कुलपति प्रो. हरीश शर्मा, नैक सलाहकार डॉ. बीएस पोनमुदिराज व सहायक सलाहकार निलेश पांडेय, गुवाहाटी विवि के कुलपति प्रो. प्रताप ज्योति हॉन्डिक्यू, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के स्वामी ध्यानागमयानंद, अविनाशिलिंगम विवि के चांसलर प्रो. एसपी त्यागराजन और सलाहकार डॉ. सुजाता पी संघबाग ने विचार रखे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा कामिनी चौहान, पंकज जानी समेत प्रदेश के 34 विश्वविद्यालयों के कुलपति भी उपस्थित थे।
पीएम के सलाहकार ने भी दिए सुझाव
कार्यशाला में प्रधानमंत्री के सलाहकार अमित खरे भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि नैक मंथन का ये कार्यक्रम एनईपी के क्रियान्वयन में बड़ा कदम है। उत्तर प्रदेश की भूमिका शिक्षा के बदलाव में महत्वपूर्ण रही है। नैक आवेदन के पहले स्वमूल्यांकन जरूरी है।