ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार।
- फोटो : amar ujala
फर्जी कॉल सेंटर के जरिये साइबर अपराध करने वाले 119 आरोपियों को राजधानी की पुलिस ने बृहस्पतिवार को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। दो दिन तक हुई पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की गई। सभी को पुलिस लाइन में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर के मुताबिक गिरोह के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम, डिजिटल डाटा और फर्जी दस्तावेज व अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। गिरोह के ऑपरेशन मैनेजर अहमदाबाद के ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार से पूछताछ की गई है। आरोपियों ने गिरोह के सरगना का नाम विनीत शर्मा बताया है, जो अहमदाबाद का रहने वाला है।
ये भी पढ़ें - राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय और अनिल को ट्रस्ट देगा कारण बताओ नोटिस, जवाब के बाद ही होगी कार्रवाई
ये भी पढ़ें - पूरे यूपी में छाया मानसून, 44 जिलों में गरज चमक और वज्रपात की चेतावनी
विनीत की तलाश में पुलिस टीम गठित की गई है। गिरोह में जितने लोग भी शामिल हैं। सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छानबीन में सामने आया है कि गिरोह में उन्हीं लोगों को शामिल किया जाता था, जो इंटरनेशनल कॉलिंग प्रोसेस के बारे में जानते थे। कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था भी फर्जी कंपनी सोलारिस सॉल्यूशन की ओर से की जाती थी।
गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टो में करते थे वसूली
गिरोह ठगी की रकम सीधे बैंक खातों में नहीं लेता था। आरोपी गिफ्ट कार्ड, डिजिटल वाउचर व क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से वसूली करते थे। यह सब इसलिए किया जाता था ताकि गिरोह के मास्टरमाइंड तक पुलिस न पहुंच सके। डिजिटल माध्यम से ही रकम आगे भेजे जाते थे। आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में केस पंजीकृत किया गया है।
गोमतीनगर विस्तार में बना रखा था अड्डा
गिरोह के अधिकांश लोगों को गोमतीनगर विस्तार के अलग-अलग अपार्टमेंट में रहने की व्यवस्था की गई थी। दोनों ऑपरेशन मैनेजर सतलज अपार्टमेंट में रहते थे। दोनों ने अन्य आरोपियों के लिए सुशांत गोल्फ सिटी, हजरतगंज और गोमतीनगर इलाके में रहने के लिए कमरे उपलब्ध कराए थे। सभी को निर्देश दिया गया था कि वे अपने काम के बारे में स्थानीय लोगों से कोई चर्चा नहीं करेंगे।