लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कुलपति प्रो. मनुका खन्ना की अध्यक्षता में आयोजित विद्या परिषद की बैठक में शोध अध्यादेश 2025 को मंजूरी दी गई। अब लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध स्नातक कॉलेजों के शिक्षक पीएचडी कराने के लिए अर्ह नहीं होंगे। हालांकि इस नए अध्यादेश का लुआक्टा संघ पुरजोर विरोध कर रहा है। शिक्षक संघ इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई की बात कह रहा है।
बता दें कि इस शोध अध्यादेश 2025 का असर ये होगा कि लविवि से संबद्ध लखनऊ, रायबरेली, हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर खीरी के यूजी कॉलेजों की पीएचडी की लगभग 600 सीटें समाप्त हो जाएंगी। इससे पहले लविवि व अन्य काॅलेजों को मिलाकर लगभग एक हजार सीटें थीं। इस तरह पीएचडी प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को दोगुनी मशक्कत करनी होगी।
शिक्षक संघ आर-पार की लड़ाई के मूड में
बीते शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय और महामंत्री डॉ. अंशु केडिया की अगुवाई में दर्जनों शिक्षकों ने इस नए अध्यादेश का विरोध किया। शिक्षकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर कॉरिडोर में धरना देकर एलयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। डॉ. मनोज का कहना है कि यूजी शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किए जाने और इस नए नियम के विरोध में बड़े आंदोलन की तैयारी है। आंदोलन में धरना प्रदर्शन, अनशन समेत जेल भरो आंदोलन की भी बात कही है। आंदोलन के दाैरान बड़ी संख्या में शिक्षकों के साथ राज्यपाल भवन मार्च करने की भी बात कही।
शिक्षक आंदोलन से पटरी से उतरेगी पढ़ाई और परीक्षाएं
लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि शिक्षक संघ व्यापक आंदोलन का मूड बना चुका है। बड़े पैमाने पर पढ़ाई और परीक्षाओं का बहिष्कार किया जाएगा। अब सवाल यह है कि आंदोलन लंबा खिंचा तो विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध काॅलेजों की पढ़ाई लिखाई और परीक्षा व्यवस्था काॅपियों का मूल्यांकन सब कुछ प्रभावित होगा। इस संबंध में एलयू प्रशासन का कहना है कि यूजीसी की गाइडलाइंस का पालन हुआ है। विद्या परिषद की मंजूरी मिल गई है। इसे अब कार्य परिषद में रखा जाएगा।
वर्जन:
कुलपति की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में यूजीसी गाइडलाइंस का छात्रहित में अक्षरश पालन करने का निर्णय लिया गया। जिसके मद्देनजर शोध अध्यादेश 2025 पारित हुआ।
- डाॅ दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता, लविवि