लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को अब प्री-पीएचडी कोर्सवर्क के लिए स्वयं (SWAYAM) के तय चक्र का इंतजार नहीं करना होगा। विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की बुधवार को हुई बैठक में शोधार्थियों के लिए विश्वविद्यालय का अपना आठ सप्ताह का ऑनलाइन मूक (MOOC) कोर्स शुरू करने को मंजूरी दे दी गई। दो क्रेडिट वाले इस कोर्स का नाम ‘एथिक्स फर्स्ट : एक्सीलेंस इन रिसर्च एंड रिस्पॉन्सिबल पब्लिशिंग’ रखा गया है। इससे शोधार्थी शोध प्रस्ताव और फील्डवर्क के साथ अनिवार्य एथिक्स क्रेडिट पूरा कर सकेंगे।
कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी की अध्यक्षता में मालवीय सभागार में हुई विद्या परिषद की बैठक में शैक्षणिक विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा समेत सभी संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष और परिषद के सदस्य मौजूद रहे। बैठक में एनआईईएलआईटी के सहयोग से सत्र 2026-27 से पांच तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने को भी मंजूरी दी गई। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अवधारणाएं, मशीन लर्निंग के मूल सिद्धांत, कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स (सीसीसी), ओ-लेवल आईटी और सूचना सुरक्षा के पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स के तहत वैकल्पिक, मूल्य संवर्धित या कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम के रूप में क्रेडिट दिया जाएगा।
भारतीय उदाहरणों पर बनेगा केस स्टडी सेंटर
विश्वविद्यालय में स्वतंत्र सेंटर फॉर केस स्टडीज स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। केंद्र स्थानीय उद्योगों, एमएसएमई, ओडीओपी, स्टार्टअप, सामाजिक चुनौतियों और लोक प्रशासन से जुड़े भारतीय उदाहरणों पर मौलिक केस स्टडी तैयार करेगा। इसमें प्रबंधन के साथ कला, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, विज्ञान, विधि, शिक्षा, इंजीनियरिंग और पर्यावरण जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा। केस तैयार करने वाले शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए रॉयल्टी मॉडल लागू करने का प्रस्ताव है।
पांच वर्षीय एलएलबी में अब तमिल भी शामिल
पांच वर्षीय एलएलबी और बीबीए एलएलबी में वैल्यू एडेड कोर्स के तहत भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में तमिल को भी शामिल किया गया है। अब विद्यार्थी हिंदी, संस्कृत, जर्मन और फ्रेंच के साथ तमिल का अध्ययन कर सकेंगे।