सांस तेज चलने, दिमागी हालत ठीक न होने के लक्षण दिखें तो ये ‘शॉक ’ हो सकता है। ब्लड प्रेशर लो होने के कारण होने वाली इस दिक्कत के कारण 50 से 70 फीसदी मरीजों की मौत हो सकती है। इसलिए चिकित्सकों को चाहिए वह मरीजों की स्थिति पर नजर रखें जिससे जान बचाई जा सके।
‘मैनेजमेंट ऑफ शॉक इन ट्रॉमा: रीसेंट ट्रेंड’ विषय पर एक स्थानीय होटल में शनिवार को आयोजित सतत् चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में ये जानकारी केजीएमयू के ऑर्थोपैडिक सर्जन प्रो. अजय सिंह ने दी।
प्रो. अजय सिंह ने बताया कि शॉक का मतलब ब्लड प्रेशर कम हो जाना है। इससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन कम मिलने लगती है। इसकी वजह से मरीज को उलझन होने लगती है।