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'लव जेहाद' हिंदू संस्कारों पर हमला है: संघ

Mon, 20 Oct 2014 02:44 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
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जैसे कि पहले से ही संकेत थे, बैठक में लव जेहाद का भी मुद्दा चर्चा में रहा। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह सिर्फ प्रेम जाल में फंसाकर हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण कराने भर का मामला नहीं है, बल्कि हिंदू विवाह पद्धति और संस्कारों पर हमला है।
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हिंदू संस्कृति को नष्ट करने की साजिश का हिस्सा है। बैठक में आतंकी तत्वों को कड़ा सबक सिखाने की जरूरत बताई गई। सरसंघचालक ने भी प्रतिनिधियों की बात से सहमति जताई।

उन्होंने कहा कि अलकायदा और आईएसआईएस जैसे संगठनों की धमकी चिंता पैदा करने वाली है। साथ ही समाज में मौजूद अलगाववादियों पर निगाह रखने और उन्हें दंडित करने की जरूरत है। इसके लिए समाज में भी जागरूकता पैदा करनी होगी।
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सियासी दल भी निशाने पर
कई प्रतिनिधियों ने कहा कि लव जेहाद जैसे मामलों में भाजपा व मित्र दलों के अलावा शेष राजनीतिक दलों की सरकारों का रुख आरोपियों के प्रति समर्थन व संरक्षण का रहता है। इससे उनके हौसले बढ़ते हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई जगह ऐसे उदाहरण मौजूद हैं। इसकी वजह से हिंदुओं को अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है।

इसी तरह कुछ दलों द्वारा वोट के लालच में आतंक के आरोपियों को भी समर्थन पर चिंता जताई गई। सरसंघचालक ने भी समापन भाषण में प्रतिनिधियों की सारी बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थितियां हैं, पर वास्तविक परिवर्तन समाज को जागरूक करके और उसका हौसला बढ़ाकर ही लाया जा सकता है।

देश के अंदर से लेकर बाहर तक की फिक्र

जानकारी के मुताबिक, बैठक में देश की आंतरिक व सीमा के मौजूदा हालात पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र में सरकार बनने के बावजूद हिंदू विरोधी ताकतें बाज नहीं आ रही हैं। यह बात उत्तर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भी कही।

बताया कि हिंदुओं को तरह से तरह से उत्पीड़न करने की कोशिश होती है। कई जगह तो राज्य सरकार की नीतियां हिंदू विरोधी ताकतों की मदद करती हैं। इसलिए केंद्र सरकार से इस बारे में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया जाना चाहिए।

कुछ प्रतिनिधियों ने चीन व पाकिस्तान की तरफ से होने वाली घुसपैठ और पाकिस्तान की तरफ से नागरिकों पर की जा रही गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देने की जरूरत बताई।
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इन बातों को लेकर भी संघ है चिंतित

बैठक के तीसरे दिन सुबह के सत्र में संगठनों की समीक्षा का दौर चला। इस दौरान संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय की कमी की चिंता उजागर हुई। कहा गया कि कई बार एक ही नगर में अलग-अलग संगठनों की तरफ से कार्यक्रम इस तरह तय कर दिए जाते हैं कि उनकी तिथियां आपस में टकराती है। नतीजतन लोग बंट जाते हैं। कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी कम होती है, जिससे समाज में भी गलत संदेश जाता है।

बैठक में नहीं आया कोई प्रस्ताव
संघ की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक समाप्त हो गई लेकिन इसमें कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। जानकारी के मुताबिक, बैठक चर्चा और भविष्य की चिंताओं तक ही सिमटी रही। वैसे भी केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में हमेशा प्रस्ताव लाया ही जाता रहा हो, यह जरूरी नहीं है। हालांकि इस बार की बैठक में प्रस्ताव न लाने का कारण सोची-समझी रणनीति लगती है।

दरअसल, अब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है। ऐसे में अगर कोई प्रस्ताव लाया जाता तो संबंधित विषय पर केंद्र सरकार की भूमिका की समीक्षा करनी पड़ती और यह रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती। इसलिए फिलहाल बैठक में कोई प्रस्ताव न लाना ही शायद उचित समझा गया।
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