फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lok Sabha Election 2024: सोशल मीडिया ने चुनाव प्रचार सामग्री के बाजार को किया मंदा, 40% पर सिमटा कारोबार

Wed, 17 Apr 2024 03:03 PM IST
ishwar ashish विभाकर शुक्ल, अमर उजाला, लखनऊ

सार

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रचार सामग्री का कारोबार घटा है। अब प्रत्याशी रील्स के जरिए प्रचार करना बेहतर समझ रहे हैं। प्रचार सामग्री का व्यापार अब 40 फीसदी पर आ गया है।
विज्ञापन
लखनऊ के दारुलशफा के सामने चुनाव प्रचार सामग्री की दुुकान। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए इस बार डिजिटल प्लेटफार्म का दायरा बढ़ा है। इस बदलते ट्रेंड का प्रभाव परंपरागत तरीकों से प्रचार के लिए प्रयुक्त होने वाले प्रिंटिंग कारोबार पर पड़ा। प्रचार के लिए बाजार में झंडा, सीटी, बैनर और बिल्ला सहित अन्य प्रचार सामग्री की मांग तेजी से घटी है। यदि चुनाव सामग्री के थोक कारोबारी की मानें तो इस बार अभी तक पूर्वांचल के आसपास के जिलों से मांग ही नहीं आ रही है।

विज्ञापन


बस पांच वर्ष पहले की ही बात है। चुनाव कैसा भी हो, एक माह पूर्व से ही चुनाव प्रचार सामग्री के बाजार में उछाल आ जाता था। थोक कारोबारी झंडा, सिटी, बिल्ला, टोपी, टीशर्ट, महिलाओं के उपयोग के लिए पार्टी का चुनाव चिन्ह लगा बिंदी, चूड़ी सहित अन्य सामग्री का ऑर्डर दे देते थे। राजनीतिक दलों की ओर से भी पहले ही ऑर्डर मिला जाता था। प्रत्याशी अपनी फोटो के साथ पोस्टर छपवाने के लिए परेशान रहते थे। 

ये भी पढ़ें - सूर्य की किरणों ने पांच मिनट तक किया रामलला का तिलक, यहां देखें - अलौकिक तस्वीरें
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - सूर्य तिलक: राम के ललाट पर सूर्य देव ने किया तिलक, पांच मिनट तक हुए अभिषेक को कौतुक से देखती रही दुनिया


व्यापारी दिव्यांश गर्ग का कहना है कि यहीं पर पुश्तों से प्रचार सामग्री का व्यापार करने वाले अग्रवाल बंधु कहते है कि पहले उम्मीदवार प्रचार सामग्री पर बारह से पंद्रह लाख रुपये आराम से खर्च करता था, लेकिन अब इसका आधा भी खर्च नहीं कर रहा है। इस बार के चुनाव में प्रिंटिंग कारोबार पर मंदी छाई हुई है। इस लोकसभा चुनाव में डिजिटलीकृत प्रणाली ने चुनावी प्रचार पर अपना गहरा प्रभाव डाला है। इससे सियासी प्रचार के बदले चलन से प्रिंटिंग कारोबार चौपट हो गया है।

चालीस फीसदी ही रह गया कारोबार
चुनाव सामग्री का जीपीओ के पास व्यापार करने वाले रघुराज पाल का कहना है कि अब तक उन्हें एक भी आर्डर नहीं मिला है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में एक माह पहले से ही सामग्री का ऑर्डर मिल जाता था। यहीं पर चुनाव सामग्री बेचने वाले देव पूजा इंटरप्राइजेज के संचालक अनिल बताते है कि उनकी दुकान पच्चीस साल पुरानी है लेकिन ऐसी मंदी कभी भी नहीं थी।

बेरौनक नजर आ रही हैं दुकानें 
चुनाव के दौरान प्रिंटिंग प्रचार सामग्री का थोक कारोबार के लिए प्रसिद्ध अमीनाबाद की लाल मस्जिद गली, भानुमती चौराहा हो या फिर पार्टी कार्यालय के सामने के कारोबारी सभी के यहां पूर्वांचल व अवध के जिलों के छोटे व्यापारियों की भीड़ लगी रहती थी। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में यहां सन्नाटा है। व्यापारी इतने मायूस हैं कि दुकानें बेरौनक नजर आ रही हैं क्योंकि उन्हें ठीक से सजाया ही नहीं गया है।
विज्ञापन


पोस्टर नहीं रील्स की बढ़ी मांग
चुनाव में प्रत्याशी डिजिटल कैंपेनिंग पर काम कर रहे हैं। एमबी डिजिट गोमती नगर के रमेश रस्तोगी कहते है कि प्रचार का तरीका पूरी तरह बदल गया है। 

पहले चुनाव के दौरान पोस्टरों को दीवारों पर चस्पा किया जाता था। इसमें चुनाव आयोग ने कई नियम लागू कर दिए हैं। इससे प्रत्याशी अब इससे किनारा कर रहे है। वैसे भी अब मीम्स और डिजिटल पोस्टर का जमाना है। इसी की मांग बाजार में है। प्रत्याशियों की ओर से रील्स की सबसे ज्यादा डिमांड है। ऐसे में चुनावी सभा और रैलियों की रील्स में नए प्रयोग कर तैयार किया जा रहा है। इस बार बाजार में परंपरागत नहीं नवाचर की मांग है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें